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Sanjiv Bhasin: संजीव भसीन पर शेयर बाजार में हेरफेर करने का आरोप; SEBI ने शुरू की जांच, जुटाए सबूत

मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI), शेयर बाजार में कथित हेरफेर के एक मामले में संजीव भसीन (Sanjiv Bhasin) की भूमिका की जांच कर रहा है। संजीव भसीन, आईआईएफएल सिक्योरिटीज (IIFL Securities) के साथ जुड़े रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि SEBI ने जांच के तौर पर संजीव भासीन के डिजिटल डिवाइसों को चेक किया है और सबूत जुटाए हैं

Moneycontrol Newsअपडेटेड Jun 26, 2024 पर 7:09 PM
Sanjiv Bhasin: संजीव भसीन पर शेयर बाजार में हेरफेर करने का आरोप; SEBI ने शुरू की जांच, जुटाए सबूत
संजीव भसीन देश के बिजनेस टीवी चैनलों पर एक जाना-पहचाना चेहरा हैं

मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI), शेयर बाजार में कथित हेरफेर के एक मामले में संजीव भसीन (Sanjiv Bhasin) की भूमिका की जांच कर रहा है। इस मामले से सीधे वाकिफ लोगों ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी है। संजीव भसीन, आईआईएफएल सिक्योरिटीज (IIFL Securities) के साथ जुड़े रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि SEBI ने जांच के तौर पर संजीव भासीन के डिजिटल डिवाइसों को चेक किया है और सबूत जुटाए हैं। खबर लिखे जाने तक भसीन और सेबी ने मनीकंट्रोल के भेजे सवालों का जवाब नहीं दिया था। वहीं IIFL सिक्योरिटीज ने मनीकंट्रोल को बताया कि भसीन उसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्य नहीं थे और कंपनी के साथ उनका कार्यकाल समय से पहले ही समाप्त कर दिया गया था।

IIFL सिक्योरिटीज ने एक बयान में कहा, "संजीव भसीन, IIFL सिक्योरिटीज के साथ कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर सलाहकार के रूप में जुड़े थे। उनका कार्यकाल 30 जून 2024 को समाप्त होना था। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों के चलते भसीन का कॉन्ट्रैक्ट 17 जून 2024 को समय से पहले समाप्त हो गया है। भसीन ने हमें SEBI की जांच के बारे में सूचित किया, लेकिन उसका विवरण हमें नहीं बताया गया। इसलिए, हम टिप्पणी नहीं कर पाएंगे। कृपया ध्यान दें कि वह IIFL सिक्योरिटीज लिमिटेड या हमारे ग्रुप की किसी दूसरी कंपनी या सहयोगी फर्म के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्य नहीं थे।"

भसीन देश के बिजनेस टीवी चैनलों पर एक जाना-पहचाना चेहरा हैं, जहां वे शेयरों को लेकर अपनी राय और मार्केट के सेंटीमेंट पर चर्चा करते हैं।

शुरुआती जांच से पता चला है कि भसीन पहले एक निजी कंपनी को कुछ शेयर खरीदने का निर्देश देते थे, फिर वह टीवी पर आकर दर्शकों के सामने उन्हीं शेयरों की सिफारिश करते थे। जब शेयरों में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ जाती थी और उसकी कीमत ऊपर चली जाती थी, तो फिर वह निजी कंपनी इन शेयरों को बेचकर निकल जाती थी।

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