सेबी म्यूचुअल फंडों के लिए स्कीम की एक अलग कैटेगरी शुरू कर सकता है। इस कैटेगरी में म्यूचुअल फंड ऐसी स्कीम शुरू कर सकेंगे, जो एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ईटीसीडी) के जरिए पूरी तरह से कमोडिटी में इनवेस्ट करेगा। यह एक्टिवली मैनेज्ड फंड होगा। अभी इस प्रस्ताव पर सेबी की एक कमेटी विचार कर रही है। म्यूचुअल फंडों को ईटीसीडी में निवेश करने की इजाजत पहले से है। लेकिन, अभी निवेश की सीमा तय है। कोई फंड अपना पूरा पैसा ईटीसीडी में निवेश नहीं कर सकता है।
म्यूचुअल फंड हाउसेज की मल्टी-एसेट्स स्कीम को अपने कुल फंड का मैक्सिमम 30 फीसदी ईटीसीडी में निवेश करने की इजाजत है। हाइब्रिड स्कीमों को ईटीसीडी में अपने फंड का 10 फीसदी तक निवेश करने की इजाजत है। इनवेस्टमेंट की सीमा तय होने से अभी ईटीसीडी में म्यूचुअल फंड की स्कीमों का निवेश 10,000 करोड़ से कम है। अगर सेबी म्यूचुअल फंड हाउसेज के लिए ईटीसीडी में निवेश के लिए नई कैटेगरी बनाता है तो इससे निवेशकों को कमोडिटी मार्केट्स पर दांव लगाने का मौका मिलेगा।
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मार्केट रेगुलेटर कमोडिटी स्कीम को सिंगल कमोडिटी में 30 फीसदी निवेश की इजाजत दे सकता है। इसमें से 20 फीसदी के लिए हेज जरूरी होगा, जबकि बाकी 10 फीसदी नैकेड या नेट लॉन्ग पोजीशन हो सकती है। ईटीसीडी के साथ दिक्कत यह है कि अभी ऐसी कमोडिटी की संख्या काफी कम है, जिनमें अच्छी लिक्विडिटी है। अगर ग्रॉस एक्सपोजर के लिए 10 फीसदी की सीमा तय की जाती है तो स्कीम को कम से कम 10 कमोडिटीज में निवेश करना होगा, जिसमें काफी मुश्किल आ सकती है।