IPO में मर्चेंट बैंकर्स के खेल पर लगेगी रोक, सेबी जल्द पेश कर सकता है सख्त नियम

आईपीओ में मर्चेंट बैंकर्स के रोल से जुड़ा एक बड़ा मसला हितों का टकराव है। दरअसल, मर्चेंट बैंक के डायरेक्टर्स या मैनजमेंट से जुड़े सीनियर अफसर कई बार उस कंपनी के आईपीओ में बोली लगाते हैं, जिसके आईपीओ का वे प्रबंधन कर रहे होते हैं

अपडेटेड Oct 11, 2024 पर 5:39 PM
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सेबी ने अगस्त में एक डिस्कशन पेपर इश्यू किया था। इसमें मर्चेंट बैंकर्स से जुड़े सेबी के रेगुलेशन में बदलाव का प्रस्ताव शामिल था।

सेबी कंपनी के आईपीओ में बड़ा रोल निभाने वाले मर्चेंट्स बैंकर्स के लिए नियम सख्त करने जा रहा है। इस मामले से जुड़े सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह बताया है। सेबी की नजर काफी समय से मर्चेंट बैंकर्स से जुड़े नियमों पर है। उसने इस बारे में मार्केट पार्टिसिपेंट्स की राय मांगी थी। सूत्रों ने बताया कि फीडबैक के आधार पर तैयार नए नियमों को सेबी जल्द पेश कर सकता है। सेबी के बोर्ड की बैठक 30 सितंबर को हुई थी, जिसमें मर्चेंट बैंकिंग से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव का ऐलान किया गया था। लेकिन, उनका मकसद ईज ऑफ डूइंग बिजनेस था। अब सेबी इन नियमों में बुनियादी बदलाव करने जा रहा है।

हितों का टकराव एक बड़ा मसला

आईपीओ में मर्चेंट बैंकर्स के रोल से जुड़ा एक बड़ा मसला हितों का टकराव  है। दरअसल, मर्चेंट बैंक के डायरेक्टर्स या मैनजमेंट से जुड़े सीनियर अफसर कई बार उस कंपनी के आईपीओ में बोली लगाते हैं, जिसके आईपीओ का वे प्रबंधन कर रहे होते हैं। मार्केट रेगुलेटर को ऐसे कई मामलों मिले हैं, जिनमें मर्चेंट बैंक के एग्जिक्यूटिव्स के पास उस आईपीओ के शेयर थे, जिस आईपीओ का प्रबंधन उनके मर्चेंट बैंक ने किया था।


इस मसले पर फीडबैक ले चुका है सेबी

इस मसले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा, "यह साफ तौर पर हितों के टकराव का मामला है। सेबी इस कमी को दूर करना चाहता है। इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों को इस मसले की जानकारी है। PMAC की मीटिंग्स में इस बारे में मार्केट रेगुलेटर ने फीडबैक लिया था।" पीएमएसी का मतलब प्राइमरी मार्केट एडवायजरी कमेटी है। यह कमेटी को सेबी को इंटरमीडियरीज से जुड़े मसलों पर सेबी को सलाह देती है। यह प्राइमरी मार्केट में निवेशकों के हितों का भी ध्यान रखती है।

एसएमई के आईपीओ में धड़ल्ले से हो रहा खेल

एक सूत्र ने बताया कि बड़ी कंपनियों के आईपीओ में तो मर्चेंट बैंकों के एग्जिक्यूटिव्स के पास आईपीओ लाने वाली कंपनी के शेयर होने के कुछ मामले मिले हैं। लेकिन, एसएमई आईपीओ में ऐसे मामलों की कमी नहीं है। इससे पहले मनीकंट्रोल ने कुछ मर्चेंट बैंकर्स और एसएमई आईपीओ सेगमेंट के तथाकथित एडवाजरी फर्मों के बीच मिलीभगत की खबर दी थी। मनीकंट्रोल ने यह भी बताया था कि किस तरह इस मिलीभगत से कंपनियों को अपने इश्यू में ज्यादा सब्सक्रिप्शन हासिल करने में मदद मिलती है।

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मर्चेंट बैंकर्स के निवेश की सीमा तय हो सकती है

सेबी ने अगस्त में एक डिस्कशन पेपर इश्यू किया था। इसमें मर्चेंट बैंकर्स से जुड़े सेबी के रेगुलेशन में बदलाव का प्रस्ताव शामिल था। इसमें कई बातों के अलावा उस कंपनी के आईपीओ में मर्चेंट बैंक के एग्जिक्यूटिव के निवेश की सीमा तय करने का भी प्रस्ताव था, जिसका प्रबंधन एग्जिक्टिव से जुड़ा मर्चेंट बैंक कर रहा है। हालांकि, अगर म्यूचुअल फंड्स के जरिए मर्चेंट बैंक का एग्जिक्यूटिव उस कंपनी के शेयरों में हिस्सेदारी रखता है, जिसका प्रबंधन उसके मर्चेंट बैंक ने किया है तो सेबी को एतराज नहीं है।

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