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SEBI के खिलाफ क्यों गुस्से में हैं रिसर्च एनालिस्ट्स? कई ने हमेशा के लिए पेशा छोड़ने की दे दी धमकी

मनीकंट्रोल ने जिन रिसर्च एनालिस्ट्स के साथ बात की, उनका कहना है कि इन नियमों ने नए लोगों के लिए रिसर्च एनालिस्ट के रूप में रजिस्टर्ड कराने की प्रक्रिया को सरल बना दिया है। लेकिन पहले से रजिस्टर्ड एनालिस्ट्स के लिए नियमों के पालन का बोझ बढ़ा दिया है

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Jan 21, 2025 पर 3:30 PM
SEBI के खिलाफ क्यों गुस्से में हैं रिसर्च एनालिस्ट्स? कई ने हमेशा के लिए पेशा छोड़ने की दे दी धमकी
एनालिस्ट्स को डर है कि SEBI के रुख से 'खराब इरादे वाले' लोग बाजार में आ जाएंगे

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने हाल ही रिसर्च एनालिस्ट्स (Research Analysts) को लेकर कुछ नए नियम जारी किए थे। हालांकि रिसर्च एनालिस्ट (RAs) अब इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। यहां तक कि कुछ बड़े नामों ने नियमों को वापस नहीं लिए जाने की स्थिति में अपनी सेवाओं को बंद करने का इरादा भी जताया है। सेबी ने बीते 8 जनवरी को 'रिसर्च एनालिस्ट्स के लिए गाइडलाइंस' नाम से एक सर्कुलर जारी कियाा था। मनीकंट्रोल ने जिन रिसर्च एनालिस्ट्स के साथ बात की, उनका कहना है कि इन नियमों ने नए लोगों के लिए रिसर्च एनालिस्ट के रूप में रजिस्टर्ड कराने की प्रक्रिया को सरल बना दिया है। लेकिन पहले से रजिस्टर्ड एनालिस्ट्स के लिए नियमों के पालन का बोझ बढ़ा दिया है।

एनालिस्ट्स को डर है कि SEBI के इस तरह के रुख से 'खराब इरादे वाले' लोग बाजार में आएंगे और फिर आगे चलकर नियामक को इसे रोकने के लिए और सख्त नियम लागू करने पड़ेंगे। इससे ईमानदारी से काम कर रहे प्रोफेशनल्स के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा।

Finsec Law Advisors के फाउंडर और SEBI के पूर्व कानूनी प्रमुख, संदीप पारेख ने X (पूर्व में ट्विटर) पर कहा, "SEBI अपनी नियामक नीतियों में हद से ज्यादा सख्ती कर रहा है और इससे कुशल और ईमानदार शोधकर्ता और सलाहकार बाजार से बाहर हो जाएंगे।" उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह जारी रहा, तो "बाजार में सिर्फ अयोग्य और बेईमान सलाहकार ही रह जाएंगे।"

फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के फाउंडर और SEBI के लीगल और इनफोर्समेंट डिपार्टमेंट के पूर्व हेड, संदीप पारेख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर कहा, "SEBI अपनी नियामक नीतियों में हद से ज्यादा सख्ती कर रहा है और ईमानदार व अच्छे रिसर्चर और एडवाइजर्स को बाजार से बाहर कर रहा है। अगर यह इसी तरह चलता रहा, तो फिर "केवल अक्षम और बेईमान, या अक्षम या बेईमान सलाहकार ही बाजार में बचे रहेंगे"।

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