सेबी ने एक बार फिर निवेशकों को वर्चुअल ट्रेडिंग और स्टॉक प्राइसेज से लिंक्ड गेमिंग प्लेटफॉर्म से सावधान किया है। मार्केट रेगुलेटर ने 4 नवंबर को इस बारे में एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि ऐसे प्लेटफॉर्म्स को सेबी की इजाजत नहीं है। सर्कुलर में कहा गया है कि मार्केट रेगुलेटर को पता चला है कि कुछ ऐप्स, वेब अप्लिकेशंस और प्लेटफॉर्म वर्चुअल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या पेपर ट्रेडिंग या फैंटेसी गेम्स ऑफर कर रहे हैं। यह सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट (रेगुलेशन) एक्ट, 1956 और सेबी एक्ट, 1992 का उल्लंघन है। दोनों एक्ट का मकसद निवेशकों के हितों की रक्षा करना है।
निवेशकों के रिस्क के लिए सेबी जिम्मेदार नहीं होगा
मार्केट रेगुलेटर ने कहा है कि अनअथॉराइज्ड स्कीम में निवेशकों का पार्टिसिपेशन उनके अपने रिस्क पर होगा। ऐसी स्कीम में इनवेस्टर के पर्सनल और गोपनीय डेटा की शेयरिंग भी होती है। ऐसी स्कीम और प्लेटफॉर्म सेबी के पास रजिस्टर्ड नहीं होते हैं। SEBI ने यह भी कहा है कि निवेशक अगर ऐसी स्कीम या प्लेटफॉर्म से जुड़ी कोई शिकायत करना चाहते हैं तो वे सेबी के एप्रूव्ड सिस्टम के जरिए शिकायत नहीं कर सकेंगे।
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बाजार में तेजी का फायदा उठाने के लिए आ चुके हैं कई एप्स
सेबी पहले भी ऐसे ऐप्स, स्कीम और प्लेटफॉर्म को लेकर निवेशकों को आगाह कर चुका है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को सिर्फ सेबी से मान्यताप्राप्त स्कीम, ऐप और प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसकी बड़ी वजह यह है कि इससे शिकायत की स्थिति में निवेशक के पास सेबी के शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की सुविधा होगी। पिछले एक-दो साल में बाजार में आई तेजी का फायदा उठाने के मकसद से कई प्लेटफॉर्म और स्कीम बाजार में आ गई हैं, जिन्हें सेबी का एप्रूवल हासिल नहीं है।