Sensex 961 प्वाइंट्स फिसला, निफ्टी 25200 से नीचे, आगे मार्केट चढ़ेगा या गिरेगा?
टेक्निकल लिहाज से मार्केट पर दबाव बढ़ गया है। Nifty 25,400 के सपोर्ट जोन को तोड़ने के बाद अब 25,100-25,150 प्वाइंट्स की रेंज के करीब है। एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर निफ्टी नीचे में 25,000 के लेवल को तोड़ता है तो फिर नुकसान बढ़ेगा
Bank Nifty भी अहम मुकाम पर है। 61,200-61,400 सप्लाई जोन से बार-बार रिजेक्ट होने के बाद यह 60,500 के करीब बंद हुआ है।
शेयर बाजार में 27 फरवरी को बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 1.25 फीसदी यानी 317 प्वाइंट्स क्रैश कर गया, जबकि सेंसेक्स 1.17 फीसदी यानी 961 प्वाइंट्स लुढ़का। खास बात यह है कि निफ्टी 25,200 के नीचे आ गया है। सवाल है कि क्या बाजार के प्रमुख सूचकांक अपने सपोर्ट के लेवल पर स्टैबलाइज करेंगे या गिरावट बढ़ने वाली है?
25000 का लेवल टूटने पर नुकसान बढ़ेगा
टेक्निकल लिहाज से मार्केट पर दबाव बढ़ गया है। Nifty 25,400 के सपोर्ट जोन को तोड़ने के बाद अब 25,100-25,150 प्वाइंट्स की रेंज के करीब है। एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर निफ्टी नीचे में 25,000 के लेवल को तोड़ता है तो फिर नुकसान बढ़ेगा। ऐसे में निफ्टी 24,900-24,700 की तरफ बढ़ेगा।
निफ्टी को 25400 के ऊपर लगातार बंद होना पड़ेगा
Enrich Money के सीईओ पोनमुदी आर ने कहा कि 200-डे EMA से नीचे जाने का मतलब है कि स्ट्रक्चर और कमजोर हो गया है। उन्होंने कहा, "निगेटिव आउटलुक को न्यूट्रलाइज करने के लिए 25,400 के ऊपर निफ्टी का लगातार बंद होना जरूरी है। इसके उलट अगर निफ्टी 25,000 के नीचे जाता है तो फिर यह 24,900-24,700 की तरफ बढ़ेगा।" उन्होंने यह भी कहा कि मोमेंटम इंडिकेटर्स बेयरिश टेरीटरी में बने हुए हैं।
Bank Nifty भी अहम मुकाम पर है। 61,200-61,400 सप्लाई जोन से बार-बार रिजेक्ट होने के बाद यह 60,500 के करीब बंद हुआ है। डेरिवेटिव्स पोजिशनिंग से नए शॉर्ट बिल्ड-अप का संकेत मिलता है। 61,000 के करीब एग्रेसिव कॉल राइटिंग और लोअर स्ट्राइक्स की तरफ ओपन इंटरेस्ट के शिफ्ट करने से तब तक कैरी-फॉरवर्ड बेयरिश झुकाव दिखेगा जब तक बैंक निफ्टी फिर से 61,100 के लेवल को हासिल नहीं कर लेता।
डोमेस्टिक ग्रोथ ट्रेंड से मार्केट को मिल रहा कुछ सपोर्ट
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में हेड ऑफ रिसर्च (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका को शेयरों की कीमतें सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है। उन्होंने अगले हफ्ते सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसकी वजह ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव है। उन्होंने कहा, "हालांकि डोमेस्टिक ग्रोथ ट्रेंड्स और सेक्टोरल ट्रैक्शन से कुछ सपोर्ट मिल रहा, लेकिन शॉर्ट टर्म में मार्केट की चाल तय करने में इंस्टीट्यूसनल फ्लो की दिशा और मैक्रो डेवलपमेंट का बड़ा हाथ होगा।"
ग्लोबल मैक्रो ट्रिगर्स का बढ़ा है असर
कपनियों के नतीजों का सीजन खत्म होने के करीब है। ऐसे में डोमेस्टिक ट्रिगर्स कम हो रहे हैं। उधर, ग्लोबल मैक्रो ट्रिगर्स का असर बढ़ रहा है। फॉरेन फ्लो की दिशा बदल रही है, उतारचढ़ाव फिर से बढ़ रहा है, क्योंकि इंडिया वीआईएक्स 27 फरवरी को करीब 5 फीसदी चढ़ा। आईटी सेक्टर फरवरी में 19 फीसदी से ज्यादा गिरा है। सितंबर, 2008 के बाद आईटी इंडेक्स में किसी एक महीने में यह सबसे बड़ी गिरावट है।
इकोनॉमी में मजबूती के संकेत
तीसरी तिमाही में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ रिवाइज्ड बेस ईयर के आधार पर करीब 7.8 फीसदी रही। एनालिस्ट्स का कहना है कि यह इकोनॉमी में मजबूती का संकेत है। इससे अच्छी घरेलू मांग के सपोर्ट से इकोनॉमी में व्यापक आधार वाले मोमेंटम का पता चलता है।
खेमका का कहना है कि इसे ध्यान में रखते हुए स्ट्रॉन्ग अर्निंग्स पर फोकस के साथ घरेलू डिमांड पर आधारित सेक्टर की तरफ शिफ्ट करना सही होगा। फाइनेंशियल्स, इंश्योरेंस, एफएमसीजी और हेल्थकेयर सही दिख रहे है। हेल्दी ऑर्डरबुक वाले कुछ कैपिटल स्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल लिंक्ड सेगमेंट्स में भी कुछ मौके दिख सकते हैं।