Share Market Rally: इंडियन स्टॉक मार्केट (Indian Stock Markets) में पिछले छह दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला 30 सितंबर को टूट गया। RBI के इंटरेस्ट रेट (Repo Rate) बढ़ाने के बावजूद शेयर बाजारों को पंख लग गए। सुबह 10 बजे रेपो रेट बढ़ने के ऐलान के बाद मार्केट में तेज रिकवरी आई। यह तेजी करीब पूरे दिन जारी रही।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1016.96 अंक यानि 1.80% की तेजी के साथ 57,426.92 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 276.25 अंक यानि 1.64% की तेजी के साथ 17,094.35 के लेवल पर बंद हुआ।
एनालिस्ट्स का कहना है कि शेयर बाजारों को पहले से इंटरेस्ट रेट में 0.50 फीसदी वृ्द्धि की उम्मीद थी। इसलिए RBI का यह कदम बाजार के लिए अप्रत्याशित नहीं था। दुनियाभर के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहे हैं। इसकी वजह इनफ्लेशन का हाई लेवल है।
इन वजहों से मार्केट में आई तेजी
इंटरेस्ट रेट वृद्धि का सिलसिला खत्म होने की उम्मीद
आरबीआई ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट का सिलसिला जारी रखने के बारे में कुछ नहीं कहा है। इससे यह माना जा रहा है कि आगे रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं होगी। अगर ऐसा होता है तो यह पूरी इकोनॉमी के लिए अच्छा होगा, क्योंकि इंटरेस्ट रेट बढ़ने का असर इकोनॉमी की ग्रोथ पर पड़ता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि इंडिया की स्थिति अमेरिका और इंग्लैंड से अलग है। यही वजह है कि इंडियन मार्केट में अमेरिकी बाजारों के मुकाबले काफी कम गिरावट आई है।
जीडीपी ग्रोथ बेहतर रहने का अनुमान
RBI ने भले ही करेंट फाइनेंशियल ईयर में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में कमी की है, लेकिन अगले वित्त वर्ष की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया है। RBI अगले फाइनेंशियल ईयर यानी 2023-24 में जीडीपी ग्रोथ 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। यह RBI के पहले के अनुमान से ज्यादा है। पहले उसने अगले फाइनेंशियल ईयर में जीडीपी ग्रोथ 6.7 फीसदी रहने की उम्मीद जताई थी।
अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में इकोनॉमी की रफ्तार सुस्त पड़ रही है। अमेरिका में जीडीपी में लगातार गिरावट आ रही है। ऐसे में इंडियन इकोनॉमी की करीब 7 फीसदी की ग्रोथ बहुत राहत देने वाली है।
महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद
आरबीआई ने कहा है कि अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में रिटेल इनफ्लेशन 6 फीसदी पर आ जाएगा। यह केंद्रीय बैंक के इनफ्लेशन के टारगेट का ऊपरी स्तर है। इससे भी बाजार ने राहत की सांस ली है। अगर इनफ्लेशन आरबीआई के टारगेट के अंदर आ जाता है तो इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की जरूरत नहीं पडे़गी। उधर, महंगाई कम होने से डिमांड अच्छी बनी रहेगी। अमेरिका सहित दूसरे देशों को इनफ्लेशन के काबू में आने का लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।