निफ्टी में लगातार 9 सत्रों के बाद तेजी लौटी है। ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल ने इसका अनुमान जताया था। ब्रोकरेज फर्म ने कहा था कि लगातार 8 सत्रों तक लाल निशान में बंद होने के बाद निफ्टी की चाल पलट सकती है। 17 फरवरी को निफ्टी की चाल बदल गई। बीएसई सेंसेक्स और बैंक निफ्टी भी हरे निशान में बंद हुए। अदाणी एंटरप्राइजेज, बजाज फिनसर्व, जायडस और इंडसइंड बैंक के शेयर सबसे ज्यादा तेजी के साथ बंद हुए।
सिर्फ एक बार लगातार 9 दिन की गिरावट
ब्रोकरेज फर्म ने कहा, "डेली प्राइस रिटर्न के एनालिसिस से पता चलता है कि शायद ही कभी निफ्टी लगातार 8 या इससे ज्यादा दिन तक गिरा है।" जेएम फाइनेंशियल का मानना है कि यहां से निफ्टी में सीमित गिरावट की संभावना दिखती है। 2015 से अब तक निफ्टी चार बार लगातार 8 सत्रों में गिरावट के साथ बंद हुआ है। सिर्फ 1 बार निफ्टी लगातार 9 सत्र तक गिरा है। पिछले 5 मौकों पर आई लगातार 8 दिनों की गिरावट से निफ्टी औसतन 4 फीसदी टूटा है।
निफ्टी के सामने 23810 की बड़ी दीवार
इस बार लागातर 8 सत्रों की गिरावट बीते एक महीने में पहली बार आई है। इस दौरान डेली क्लोजिंग बेसिस पर औसत रिटर्न 5.4 फीसदी रहा। जेएम फाइनेंशियल के मुताबिक, टेक्निकल बेसिस पर निफ्टी के लिए अगला रेसिस्टेंस लेवल 23,810 प्वाइंट पर है। अगर निफ्टी इस लेवल के पार हो गया तो लोअर टॉप और लोअर बॉटम का ट्रेंड रुक जाएगा। यह ब्रेकआउट निफ्टी के 24,800 और 26,000 की दिशा में बढ़ने का संकेत होगा।
गिरावट की स्थिति में 21800 तक फिसल सकता है
अगर निफ्टी में गिरावट आती है तो इसे 22,500 पर पहला सपोर्ट मिलेगा। इस लेवल के टूटने पर निफ्टी गिरकर 21,800 तक जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह गिरावट का शानदार मौका होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्केट में पिछले साढ़े चार महीनों से आई गिरावट ने इनवेस्टर्स खासकर नए निवेशकों को मायूस कर दिया है। लेकिन, यह समझने की जरूरत है कि हर बड़ी तेजी के बाद मार्केट में गिरावट जरूरी होती है।
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अभी खरीदारी करने पर 1-2 साल बाद मोटी कमाई
इनवेस्टर्स अगर इस गिरावट के मौके का इस्तेमाल खरीदारी के लिए करते हैं तो 1-2 साल बाद वे शानदार मुनाफे पर बैठे होंगे। जो निवेशक मार्केट में और गिरावट आने के डर से अपने शेयर बेच देंगे, उन्हें बाद में ज्यादा कीमतों पर शेयरों में निवेश के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इसका मतलब है कि उनका रिटर्न काफी कम रहेगा। स्टॉक मार्केट में मोटी कमाई के लिए शेयरों में कम भाव पर निवेश करना जरूरी है।