Stock Crash: तिमाही नतीजे आते ही शेयर धड़ाम, 14% तक टूटा भाव, शुद्ध मुनाफा 70% गिरा

Shakti Pumps Shares: शक्ति पंप्स (इंडिया) लिमिटेड के शेयरों में सोमवार 16 फरवरी को भारी गिरावट देखने को मिली। कंपनी के शेयर कारोबार के दौरान 14% तक टूट गए। यह गिरावट कंपनी के दिसंबर तिमाही के नतीजों के ऐलान के बाद आया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शेयर 13.8% गिरकर 552.10 रुपये तक पहुंच गया

अपडेटेड Feb 16, 2026 पर 3:47 PM
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Shakti Pumps Shares: कंपनी की रेवेन्यू भी 15.1% घटकर 551 करोड़ रुपये रह गई

Shakti Pumps Shares: शक्ति पंप्स (इंडिया) लिमिटेड के शेयरों में सोमवार 16 फरवरी को भारी गिरावट देखने को मिली। कंपनी के शेयर कारोबार के दौरान 14% तक टूट गए। यह गिरावट कंपनी के दिसंबर तिमाही के नतीजों के ऐलान के बाद आया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शेयर 13.8% गिरकर 552.10 रुपये तक पहुंच गया। यह इसका 11 दिसंबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है।

दोपहर 12:30 बजे के आसपास शेयर 12% की गिरावट के साथ 563 रुपये पर कारोबार कर रहा था। आज के सेशन में शक्ति पंप्स के करीब 32 लाख (3.2 मिलियन) शेयरों का कारोबार हुआ। पिछले 12 महीनों में शाक्ति पंप्स का शेयर लगभग 30.74% गिर चुका है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 में 11.31% की तेजी रही।

मुनाफे में बड़ी गिरावट

शेयर में गिरावट की मुख्य वजह कंपनी का कमजोर तिमाही प्रदर्शन रहा। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 69.6% घटकर 31.7 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 104.1 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था।


कंपनी की रेवेन्यू भी 15.1% घटकर 551 करोड़ रुपये रह गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 648.8 करोड़ रुपये थी। ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) में भी भारी गिरावट आई। यह 61.8% घटकर 59 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल यह 154.4 करोड़ रुपये था। इससे कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर भी दबाव पड़ा।

गिरावट की वजह क्या रही?

कंपनी के चेयरमैन दिनेश पाटीदार ने बताया कि तीसरी तिमाही में कंपनी ने महाराष्ट्र में प्रोजेक्ट्स के एक्जिक्यूशन की रफ्तार को जानबूझकर धीमा किया। ऐसा बढ़ते बकाया (रिसीवेबल्स) को नियंत्रित करने और बैलेंस शीट को मजबूत बनाए रखने के लिए किया गया।

कंपनी ने करीब 200 करोड़ रुपये के ऑर्डर के एक्जिक्यूशन को अस्थायी रूप से रोक दिया। इसका मकसद बकाया भुगतान की स्थिति को स्थिर करना था। हालांकि इस फैसले से तिमाही रेवेन्यू और मुनाफे पर असर पड़ा। मैनेजमेंट के अनुसार, यह फैसला शॉर्ट-टर्म रेवेन्यू वृद्धि के बजाय वर्किंग कैपिटल अनुशासन को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया।

लागत का भी दबाव

दिसंबर तिमाही में कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी भी देखने को मिली। इससे कंपनी की इनपुट लागत बढ़ी। इसके अलावा लेबर कानूनों में बदलाव के कारण कंपनी को 4.4 करोड़ रुपये का एकमुश्त खर्च भी उठाना पड़ा। इन सभी कारणों का असर कंपनी के मुनाफे और मार्जिन पर दिखा।

कमजोर तिमाही नतीजों और भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए निवेशकों ने शेयर में बिकवाली की, जिससे सोमवार को इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई।

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