Share Market Crash: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बयान के बाद शेयर बाजार में आज 19 दिसंबर को भारी गिरावट आई। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 1000 अंक गिरकर 79,242.65 अंक पर आ गया। वहीं निफ्टी 1 फीसदी लुढ़ककर 24,000 के नीचे पहुंच गया। इसके चलते निवेशकों के करीब 3.76 लाख लाख करोड़ रुपये डूब गए। लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। सबसे अधिक गिरावट आईटी, ऑटो और बैंकिंग शेयरों में देखने को मिली। इन शेयरों के इंडेक्स 2 फीसदी तक गिर गए। सिर्फ निफ्टी फार्मा इंडेक्स आज हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।
शेयर बाजार में आज की गिरावट के पीछे 4 प्रमुख कारण रहे-
1. फेडरल रिजर्व का आक्रामक रुख
शेयर बाजार पहले 2025 के दौरान ब्याज दरों में 3-4 बार कटौती की उम्मीद कर रहा था। लेकिन इसकी जगह फेडरल रिजर्व ने महज 0.50 फीसदी कटौती का संकेत दिया है। SAMCO म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर, धवल घनश्याम धनानी ने कहा, "येन कैरी-ट्रेड वाली घटना के बाद अमेरिकी बाजार में आज सबसे बड़ी पैनिक सेलिंग देखने को मिली है। इसी तरह, एशियाई बाजारों की शुरुआत भी गहरे लाल निशान में हुई।"
विदेशी निवेशकों ने एक बार फिर से भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली तेज कर दी है। पिछले 3 दिन में वह भारतीय बाजार से करीब 8,000 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। इससे बाजार में यह आशंका फिर से बढ़ गई है कि FPIs अक्टूबर की तरह शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। अक्टूबर महीने में उन्होंने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। वहीं इस साल अब तक FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में 2.94 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की है।
3. डॉलर के मुकाबले रसातल में पहुंचा भारतीय रुपया
विदेशी करेंसी मार्केट में भारतीय रुपये पर साफ दबाव दिख रहा है। एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मुकाबले भारतीय रुपये की वैल्यू 85 के भी पार चली गई है। इस साल अबतक डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 2% की गिरावट आई है। नवंबर में व्यापार घाटे में बढ़ोतरी के आंकड़े से भी आर्थिक सेंटीमेंट खराब हुआ है।
4. डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल
डॉलर इंडेक्स, दुनिया की 6 प्रमुख कंपनियों के शेयरों के मुकाबले डॉलर की वैल्यू को मापता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स उछलकर 2 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अभी डॉलर इंडेक्स 0.05 प्रतिशत बढ़कर 108.086 पर था। यह नवंबर 2022 के बाद का इसका उच्चतम स्तर है।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट, वीके विजयकुमार ने बताया, "डॉलर इंडेक्स का 108 से ऊपर जाना और 10 साल वाले यूएस बॉन्ड यील्ड का 4.52 प्रतिशत पर पहुंच जाना, शेयर बाजार के लिए बुरी खबर है क्योंकि इससे विदेशी निवेशकों के बाहर जाने का जोखिम बढ़ जाता है। हालांकि, यह केवल अस्थायी होने की संभावना है।"
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।