Share Market Crash: बाजार ने फिर मारी पलटी, सेंसेक्स दिन के हाई से 752 अंक तक फिसला; 8 कारणों से कोहराम

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में मंगलवार, 28 अप्रैल को पहले सेलिंग, फिर बाइंग और फिर सेलिंग का जबरदस्त खेल देखने को मिला। मार्केट के थोड़ी देर के लिए ही हरे होते ही निवेशक ताबड़तोड़ प्रॉफिट बुकिंग करने लगे और बड़ी गिरावट छा गई

अपडेटेड Apr 28, 2026 पर 4:16 PM
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FIIs ने सोमवार को भारतीय बाजार में 1,151.48 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

28 अप्रैल को शेयर बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया। बाजार ने शुरुआत लाल निशान में की। सेंसेक्स गिरावट के साथ 77,094.79 पर खुला और फिर पिछली क्लोजिंग से 330 अंकों तक लुढ़ककर 76,973.54 के लो तक गया। इसी तरह निफ्टी भी गिरावट के साथ 24,049.90 पर खुला और पिछली क्लोजिंग से 93.45 अंक गिरकर 23,999.25 के लो तक गया। इसके बाद बाजार हरे निशान में आया। सेंसेक्स दिन के लो से 520 अंक रिकवर हुआ और 77,493.53 के हाई तक गया। निफ्टी ने भी 24,181.80 का हाई देखा।

लेकिन इसके बाद बाजार ने फिर पलटी मारी और सेंसेक्स दिन के हाई से 752.47 अंक तक लुढ़ककर 76,741.06 के लो तक गया। निफ्टी भी दिन के हाई से 224.75 अंक टूटकर 23,957.05 के लो तक गया। बाद में सेंसेक्स 416.72 अंकों की गिरावट के साथ 76,886.91 पर और निफ्टी 97 अंकों की गिरावट के साथ 23,995.70 पर सेटल हुआ। बाजार में बिकवाली क्यों लौटी, आइए जानते हैं...

प्रॉफिट बुकिंग


सेंसेक्स और निफ्टी में बीच में लगातार दूसरे सेशन में बढ़त जारी रहने के संकेत मिले। इससे प्रॉफिट बुकिंग शुरू हो गई। फाइनेंशियल, IT और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई। बेंचमार्क इंडेक्स सोमवार को लगभग 1 प्रतिशत ऊपर चढ़े थे, जिससे तीन दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला टूट गया।

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी

ब्रेंट क्रूड का भाव 0.99 प्रतिशत बढ़कर 109.3 डॉलर प्रति बैरल हो गया। तेल की कीमतें बढ़ने से भारत के लिए आयात की लागत बढ़ जाती है, व्यापार घाटा बढ़ जाता है और महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा हो जाता है। भारत अपनी कच्चे तेल की कुल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है।

FII की बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सोमवार को भारतीय बाजार में 1,151.48 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली से बाजार में लिक्विडिटी कम हो जाती है और शेयरों की कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।

वैश्विक बाजारों की चाल

एशियाई बाजारों में गिरावट छा रही है। जापान का Nikkei 225, शंघाई का SSE Composite, जकार्ता कंपोजिट, हांगकांग का Hang Seng गिरावट में कारोबार कर रहे हैं। वहीं दक्षिण कोरिया का Kospi ऊपर है। अमेरिका में S&P 500 और Nasdaq 27 अप्रैल को नए रिकॉर्ड स्तरों पर बंद हुए।

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Nifty की एक्सपायरी

मंगलवार को Nifty की एक्सपायरी का दिन होने के कारण भी बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ऐसे दिनों में, ट्रेडर्स अपनी पोजिशन को एडजस्ट या रोल ओवर करते हैं, जिसके चलते इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।

भू-राजनीतिक चिंताएं

वैश्विक घटनाक्रमों को लेकर अनिश्चितता का असर भी बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा। एक अमेरिकी अधिकारी ने संकेत दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के उस ताजा प्रस्ताव को स्वीकार करने की संभावना कम है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम को रोके बिना ही संघर्ष को समाप्त करने की बात कही गई है। कूटनीतिक मुलाकातों के रद्द होने से इस विवाद के जल्द सुलझने की उम्मीदें भी कम हो गई हैं।

बैंकिंग शेयरों में गिरावट

एसेट-क्लासिफिकेशन और प्रोविजनिंग पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी अंतिम नियमों के बाद बैंकिंग इंडेक्स में 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। रॉयटर्स ने मैक्वेरी के हवाले से बताया है कि 1 अप्रैल, 2027 से प्रभावी होने वाले इन नियमों के कारण सरकारी बैंकों के लिए प्रोविजनिंग की जरूरतें बढ़ने का अनुमान है।

रुपये में गिरावट

रुपया मंगलवार को 41 पैसे की गिरावट के साथ 94.56 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और महीने के अंत में डॉलर की मांग में बढ़ोतरी से रुपये पर दबाव बना रहा। साथ ही सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर व्यापक रुझान भी देखने को मिला। विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने से निवेशकों का मनाबेल कमजोर हुआ है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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