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Share Markets: रिजल्ट सीजन में बाजार में कमाई करना चाहते हैं? शुभम अग्रवाल की स्ट्रेटेजी का कर सकते हैं इस्तेमाल

नतीजों का सीजन शुरू हो चुका है। यह समय ज्यादातर रिटेलर्स के लिए गतिविधियों से भरा होता है। बाजार में चल रही चर्चा पर वे दांव लगाते हैं। कभी उन्हें खुशी मिलती है तो कभी गम मिलता है। ज्यादातर गम ही मिलता है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Apr 18, 2026 पर 4:41 PM
Share Markets: रिजल्ट सीजन में बाजार में कमाई करना चाहते हैं? शुभम अग्रवाल की स्ट्रेटेजी का कर सकते हैं इस्तेमाल
नतीजे आने से पहले इंस्टीट्यूशंस, एचएनआई और स्मार्ट ट्रेडर्स अपने रिसर्च और एक्सपेक्टेशंस के आधार पर पोजीशन बनाते हैं।

वित्त वर्ष में हर तिमाही के बाद कंपनियां अपने नतीजों का ऐलान करती हैं। इसके लिए कंपनियों को 45 दिन का विंडो मिलता है। यह समय ज्यादातर रिटेलर्स के लिए गतिविधियों से भरा होता है। बाजार में चल रही चर्चा पर वे दांव लगाते हैं। कभी उन्हें खुशी मिलती है तो कभी गम मिलता है। ज्यादातर गम ही मिलता है। हालांकि, यह रिजल्ट सीजन में पैसे बनाने का स्मार्ट तरीका है। इसमें सिर्फ शेयरों के मोमेंट की जगह ट्रेडर्स के व्यवहार को भी समझना पड़ता है।

रिजल्ट से पहले कैसे काम करती है स्ट्रेटेजी

नतीजे आने से पहले इंस्टीट्यूशंस, एचएनआई और स्मार्ट ट्रेडर्स अपने रिसर्च और एक्सपेक्टेशंस के आधार पर पोजीशन बनाते हैं। ये पोजीशंस इक्विटीज और ऑप्शंस दोनों में दिखते हैं। यही वजह है कि रिजल्ट्स के ऐलान से पहले शेयरों में मूवमेंट दिखने लगता है।

ऑप्शंस मार्केट में चीजें अलग तरह से काम करती हैं। एक्सपेक्टेड वोलैटिलिटी, जिसे इंप्लॉयड वोलैटिलिटी भी कहा जाता है, रिजल्ट्स से पहले के दिनों में चढ़ जाता है। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह यह है कि रिजल्ट्स का असर शेयरों की कीमतों पर पड़ता है। इसलिए ऑप्शंस सेलर उस रिस्क को कवर करने के लिए ज्यादा प्रीमियम डिमांड करते हैं। ऑप्शंस बायर्स की डिमांड भी बढ़ जाती है, जिसका मतलब कीमतों में उछाल है।

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