वित्त वर्ष में हर तिमाही के बाद कंपनियां अपने नतीजों का ऐलान करती हैं। इसके लिए कंपनियों को 45 दिन का विंडो मिलता है। यह समय ज्यादातर रिटेलर्स के लिए गतिविधियों से भरा होता है। बाजार में चल रही चर्चा पर वे दांव लगाते हैं। कभी उन्हें खुशी मिलती है तो कभी गम मिलता है। ज्यादातर गम ही मिलता है। हालांकि, यह रिजल्ट सीजन में पैसे बनाने का स्मार्ट तरीका है। इसमें सिर्फ शेयरों के मोमेंट की जगह ट्रेडर्स के व्यवहार को भी समझना पड़ता है।
