Share Markets: शेयर बाजारों में गिरावट का सिलसिला 20 मई को जारी रहने के आसार हैं। निफ्टी में 20 मई को गिरावट दिखी है। यही हाल सेंसेक्स का भी रहा। विदेशी बाजारों से भी संकेत कमजोर हैं। अमेरिकी बाजार 19 मई को गिरावट के साथ बंद हुए। इसका असर 20 मई को एशियाई बाजारों पर दिखा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पहले क्रूड ऑयल की कीमतें बाजार की चिंता बढ़ा रही थीं। अब दुनियाभर में बॉन्ड यील्ड में उछाल बाजार की चिंता बढ़ा रहा है।
सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव
निफ्टी और सेंसेक्स कमजोर खुले। उसके बाद बाजार पर दबाव बढ़ने लगा। 9:25 बजे निफ्टी 0.64 फीसदी यानी 155 अंक गिरकर 23,459 पर चल रहा था। सेंसेक्स में 0.70 फीसदी यानी 526 अंक की गिरावट दिखी। यह 74,691 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी में 0.90 फीसदी की गिरावट दिखी।
इन शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
टाटा स्टील, लोढ़ा डेवलपर्स, गेल (इंडिया), हिंदुस्तान जिंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे दिग्गज शेयरों में 2.58 फीसदी तक की गिरावट दिखी। चढ़ने वाले शेयरों में Zydus सबसे आगे था। यह शेयर 5.22 फीसदी ऊपर चल रहा था। हिंडाल्को के शेयर में 3 फीसदी से ज्यादा तेजी दिखी। डिवीज लैब्स का शेयर 0.50 फीसदी ऊपर चल रहा था। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में शुरुआती कमजोरी के बाद रिकवरी दिखी।
निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बाजार सावधानी बरतने का है। अच्छी खबरें कम हैं और खराब खबरें ज्यादा हैं। बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों को लेकर चिंता दिख रही है। ब्रेंट क्रूड 20 मई को 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चल रहा है। उधर, अमेरिका सहित दुनियाभर के बाजारों में बॉन्ड्स यील्ड ने चिंता बढ़ा दी है। अगर बॉन्ड यील्ड में तेजी जारी रहती है तो केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं।
फार्मा और आईटी इडेक्स में दिखा स्ट्रेंथ
इस बीच, 20 मई को सिर्फ फार्मा और आईटी इंडेक्स में स्ट्रेंथ दिखा। बाकी सेक्टर कमजोर नजर आए। यह लगातार दूसरा दिन है, जब भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट दिख रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार का सेंटीमेंट कमजोर है। ऐसे में निवेश में सावधानी बरतने की जरूरत है। बाजार में गिरने वाले शेयरों की संख्या चढ़ने वाले शेयरों के मुकाबले काफी ज्यादा है। यह बाजार में कमजोरी का संकेत है।
डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के करीब
20 मई को डॉलर के मुकाबले रुपया 33 पैसे गिरकर खुला। इससे रुपया नए निचले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। खबर लिखते वक्त रुपया 96.86 के लेवल पर चल रहा था। अब यह 97 के लेवल के करीब पहुंच गया है। बीते एक महीने में भारतीय करेंसी करीब 4 रुपये गिरी है। इसका असर पूरी इकोनॉमी पर पड़ना तय है। इस साल डॉलर के मुकाबले 7 फीसदी गिर चुका है। यह एशियाई में सबसे कमजोर वाली करेंसी बन गया है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बाजार में निवेशकों को ज्यादा आक्रामक होने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसकी वजह यह है कि हालिया गिरावट के बाद बाजार के निचले स्तर का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। टेक्निकल मानकों पर भी बाजार कमजोर दिख रहा है। फंडामेंटल इंडिकेटर्स भी बाजार के लिए निगेटिव संकेत दे रहे हैं। इंडिया वीआईएक्स 3.39 फीसदी चढ़कर 19.31 पर पहुंच गया है। यह बाजार में अस्थिरता जारी रहने का संकेत है।
अगर कोई निवेश करना चाहता है तो वह कुछ खास शेयरों में निवेश कर सकता है। सिर्फ उन कंपनियों के शेयरों में पैसे लगाना ठीक होगा, जिनके फंडामेंटल्स बहुत मजबूत हैं। कई कंपनियों के शेयर गिरावट के दबाव में भी टिके रहे हैं। यह उन शेयरों में मजबूती का संकेत है। ऐसे शेयरों में निवेश किया जा सकता है। लेकिन, एक बार में ज्यााद निवेश करने की जगह आपको थोड़ा-थोड़ा पैसे लगाने चाहिए।Aurobindo Pharma, Ipca Laboratories, Radico Khaitan, Laurus Labs, Zydus Lifesciences के शेयर अपने 52 हफ्ते के हाई पर चल रहे हैं।
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