शेयर बाजार में 8 अप्रैल को आई तेजी अगले दिन जारी नहीं रह सकी। 9 अप्रैल को बाजार कमजोर खुले। उसके बाद बिकवाली दबाव बढ़ता गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार की दिक्कत अभी खत्म नहीं हुई। बाजार पर पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई का असर पड़ता रहेगा। हालांकि, 8 अप्रैल को आई तेजी का पॉजिटिव असर बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा है। इसमें क्रूड ऑयल की कीमतों में आई गिरावट का बड़ा हाथ है।
क्रूड में गिरावट से महंगा बढ़ने का डर कम हुआ
मोतीलाल फाइनेंशियल सर्विसेज में वेल्थ मैनेजमेंट के एमडी और सीईओ अजय मेनन ने कहा कि मध्यपूर्व में सीजफायर के ऐलान के बाद ब्रेंट क्रूड में 15 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। अब भी यह 100 डॉलर से नीचे बना हुआ है। इससे महंगाई और करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने का डर कम हुआ है। साथ ही रुपये को सहारा मिला है। इससे भारत जैसे उभरते बाजार का अट्रैक्शन बढ़ सकता है।
निफ्टी और सेंसेक्स में 9 अप्रैल को बड़ी गिरावट
9 अप्रैल को 2:21 बजे निफ्टी 1 फीसदी यानी 243 प्वाइंट्स गिरकर 23,752 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.21 फीसदी यानी 967 अंक की कमजोरी के साथ 76,551 पर चल रहा था। ज्यादा गिरने वाले शेयरों में जियो फाइनेंशियल (3.75 फीसदी), Interglobe Aviation (3.38 फीसदी), अंबुजा सीमेंट (2.94 फीसदी), श्रीराम फाइनेंस (2.79 फीसदी) और L&T (2.68 फीसदी) शामिल रहे।
सीजफायर जारी रहने पर बाजार में दिखेगी तेजी
जियोजित इनवेस्टमेंट्स में चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि 8 अप्रैल को आई तेजी की वजह सीजफायर और क्रूड ऑयल की कीमतों पर इसका असर था। उन्होंने कहा, "मार्केट में वैल्यूएशंस अब फेयर है। अगर पश्चिम एशिया में सीजफायर जारी रहता है तो मार्केट में मजबूती जारी रहेगी।" हालांकि, उन्होंने कहा कि लेबनान पर इजरायल का हमला एक बड़ा रिस्क है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है और मार्केट की तेजी पर ब्रेक लग सकता है।
18 महीनों तक गिरावट के बाद शेयरों की कीमतें अट्रैक्टिव
पश्चिम एशिया में लड़ाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसके बावजूद कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडिया के फंडामेंटल्स काफी मजबूत हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के एमडी और सीईओ धीरज रेली ने कहा कि पश्चिम एशिया में लड़ाई और क्रूड की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर रहने के बावजूद भारत की आर्थिक सेहत मजबूत है। पिछले 18 महीनों से बाजार में जारी गिरावट के बाद शेयरों की कीमतें अट्रैक्टिव हो गई हैं। वैल्यूएशंस अर्निंग्स की 18 गुना है, जो पहले से कम है।
इस साल के आखिर तक मार्केट रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच सकता है
उन्होंने कहा कि रिस्क-रिवॉर्ड फेवरेबल है। 5 फीसदी गिरावट के मुकाबले 10-15 फीसदी तेजी की उम्मीद दिख रही है। उन्होंने कहा कि बीते डेढ़ साल की गिरावट के बाद मार्केट इस फाइनेंशियल ईयर में ऑल-टाइम हाई पर पहुंच सकता है। निफ्टी इस साल के आखिर तक 26,373 के रिकॉर्ड लेवल तक पहुंच जाएगा। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अभी सावधानी बरतना जरूरी है। रिकवरी के लिए स्थितियां अनुकूल बनती दिख रही हैं। लेकिन, नजरें सीजफायर पर टिकी हैं।