इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजों का सीजन करीब खत्म हो गया है। अर्निंग्स के मामले में कंपनियों को आगे थोड़ी दिक्कत आ सकती है। लेकिन, उम्मीद की एक किरण दिख रही है। आरबीआई के नए बुलेटिन से इसके संकेत मिले हैं। प्राइवेट सेक्टर का पूंजी खर्च बढ़ रहा है। सरकार को पिछले दो साल से प्राइवेट सेक्टर का पूंजीगत खर्च बढ़ने का इंतजार था। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कई बार प्राइवेट सेक्टर से निवेश बढ़ाने की गुजारिश की थी। प्राइवेट कंपनियों के निवेश शुरू करने से ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा।
प्राइवेट सेक्टर में पूंजीगत खर्च बढ़ने के संकेत
RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, FY24 में प्राइवेट सेक्टर का पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) जीडीपी के 1.4 फीसदी तक पहुंच गया। FY23 में यह 0.9 फीसदी था। हालांकि, यह ग्रोथ इतनी ज्यादा नहीं है कि इसकी खुशियां मनाई जाए। नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्राइवेट सेक्टर के पूंजीगत खर्च में इम्प्रूवमेंट है, लेकिन ऐतिहासिक लेवल के मुकाबले यह अब भी कम है।
जेरोम पॉवेल की स्पीच तय कर सकती है मार्केट की दिशा
आज (23 अगस्त) जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल स्पीच देंगे। क्या आपको 2022 की उनकी स्पीच याद है? तब मार्केट में बड़ी बिकवाली दिखी थी। क्या इस बार स्थिति विपरीत होगी? विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) 1 जुलाई से बिकवाली कर रहे हैं। इस दौरान वे 28,495 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। लेकिन, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 64,698 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन की स्पीच मार्केट की दिशा तय कर सकती है। मार्केट इस स्पीच का इंतजार कर रहा है।
पेटीएम के शेयर 22 अगस्त को 3.14 फीसदी गिरकर 556 रुपये पर बंद हुए। Paytm अपने एंटरटेनमेंट टिकटिंग बिजनेस जोमैटो को 2,048 करोड़ रुपये में बेच रहा है। बुल्स का कहना है कि इस बिजनेस को बेचने के बाद अपने मुख्य बिजनेस पर फोकस बढ़ा सकती है। इस डील से उसका कैश रिजर्व बढ़ेगा। कंपनी ज्यादा ग्रोथ वाले सेगमेंट में निवेश बढ़ा सकेगी। इससे FY27 में EBITDA पॉजिटिव हो सकता है। इससे लंबी अवधि में शेयरहोल्डर्स की वैल्यू भी बढ़ेगी। मोतीलाल ओसवाल ने अपनी रिपोर्ट में इस बारे में बताया है।
ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में 22 अगस्त को 5 फीसदी गिरावट आई। इसकी वजह मुनाफावसूली थी। 9 अगस्त को लिस्टिंग के बाद से Ola Electric के शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। बुल्स का कहना है कि रेगुलेटरी सपोर्ट, कॉस्ट में कमी करने की क्षमता और बैटरी वेंचर को देखते हुए ओला इलेक्ट्रिक में रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल अच्छा दिख रहा है। कंपनी ने इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल सेगमेंट में भी एंट्री ली है। उधर, बेयर्स का कहना है कि फाइनेंस कॉस्ट ज्यादा रहने से कंपनी का लॉस जून तिमाही में बढ़ा है। कंपनी का कुल खर्च भी बढ़ा है। यह पिछले साल के 1,461 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,849 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
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श्याम मेटालिक्स का शेयर 22 अगस्त को 6.3 फीसदी के उछाल के साथ 811.35 रुपये पर बंद हुआ। ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने Shyam Metalics के शेयरों को कवर करना शुरू किया है। उसने इस स्टॉक में 60 फीसदी तेजी की उम्मीद जताई है। यूबीएस की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी कमोडिटी आधारित प्रोडेक्ट्स से अब वैल्यू-आधारित प्रोडक्ट्स की तरफ बढ़ती दिख रही है। स्पंज आयरन और अल्युमीनियन फॉयल इसके उदाहरण हैं। इससे मार्जिन बढ़ेगा। रिटर्न रेशियो में भी इम्प्रूवमेंट दिखेगा। साथ ही कमोडिटी की कीमतों में उतारचढ़ाव का कंपनी पर कम असर पड़ेगा। उधर, बेयर्स का कहना है कि कंपनी को मार्केट में बढ़ती प्रतियोगिता का सामना करना पड़ सकता है।