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Short Call: क्या ट्रंप के कार्यकाल में क्रूड ऑयल गिरकर 60 डॉलर पर आ जाएगा? जानिए Hindalco और LT Foods क्यों सुर्खियों में हैं

डोनाल्ट ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका के पास किसी दूसरे देश से ज्यादा 'लिक्विड गोल्ड' है। लिक्विड गोल्ड से उनका मतलब ऑयल और गैस से था। एनालिस्ट्स का कहना है कि ट्रंप ऑयल को संसाधन नहीं बल्कि एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 08, 2024 पर 2:42 PM
Short Call: क्या ट्रंप के कार्यकाल में क्रूड ऑयल गिरकर 60 डॉलर पर आ जाएगा? जानिए Hindalco और LT Foods क्यों सुर्खियों में हैं
एनालिस्ट्स का मानना है कि ऑयल की कीमतें गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं।

अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर ने एक बार कहा था कि अगर ऑयल आपके कंट्रोल आ जाता है तो आप दुनिया को कंट्रोल कर सकते हैं। ऐसा लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात को दिल से लगा लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद ट्रंप ने जो बयान दिया है, उससे इसका संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास किसी दूसरे देश से ज्यादा 'लिक्विड गोल्ड' है। लिक्विड गोल्ड से उनका मतलब ऑयल और गैस से था। उनके इस बयान से ऑयल मार्केट्स में भूकंप आ गया। एनालिस्ट्स ऑयल की कीमतें गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल तक आ जाने का अनुमान जता रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद ट्रंप (Donald Trump) ने कहा, "आप ऑयल (Crude Oil) की जिम्मेदारी मुझ पर छोड़ दीजिए।" उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपने कर्ज को घटाएगा। अमेरिका में हम टैक्स कम करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो चीज अमेरिका के पास है, वह चीन के पास नहीं है। दरअसल, ट्रंप के लिए ऑयल सिर्फ एक संसाधन नहीं है बल्कि यह एक हथियार है। उन्होंने टैरिफ और प्रतिबंधों के बारे में जिस तरह से चर्चा की है, उससे ग्लोबल ऑयल मार्केट को साफ संकेत गया है। सिटी के एनालिस्ट्स का मानना है कि ट्रप की पॉलिसी का मिलाजुला असर दिख सकता है। इससे ऑयल के आयात पर निर्भर करने वाले देशों को मुश्किल आ सकती है।

एनालिस्ट्स का कहना है कि ट्रंप के बतौर राष्ट्रपति अगले चार साल के कार्यकाल में ऑयल की कीमतों में नरमी आएगी। अमेरिका में ऑयल का उत्पादन बढ़ने और ट्रेड टैरिफ की वजह से ऑयल की औसत कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल तक आ जाएगी। ट्रंप ने ईरान और वेनेजुअला के ऑयल के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगाने का बात कही है। इससे दुनिया में ऑयल की सप्लाई घटेगी। इससे कुछ समय के लिए कीमतों में तेजी आ सकती है। अभी अमेरिका दुनिया में ऑयल का सबसे बड़ा उत्पादक है। ग्लोबल सप्लाई में उसकी 22 फीसदी हिस्सेदारी है। 11 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सऊदी अरब दूसरे नंबर पर है।

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