एक बार फिर से 'रिसेशन' यानी मंदी की चर्चा शुरू हुई है। मंदी आती है तो स्टॉक मार्केट में हालात बदल जाएंगे। लेकिन, जल्दबाजी में कोई कदम उठाने से पहले हमें एक प्रमुख इंडिकेटर पर गौर करना होगा। यह है-10-2 साल का यील्ड स्प्रेड। यह क्या बताता है? दरअसल, यह 10 साल के बॉन्ड्स और 2 साल के बॉन्ड्स की यील्ड के बीच के फर्क को बताता है। उदाहरण के लिए अगर 10 साल के बॉन्ड्स की यील्ड 4 फीसदी है और 2 साल के बॉन्ड्स की यील्ड 3.75 फीसदी है तो स्प्रेड 0.25 फीसदी यानी 25 बेसिस प्वॉइंट्स है।
पिछले दो सालों में यह यील्ड कर्व (Yield Curve) निगेटिव में था, जो इस साल अगस्त के अंतिम हफ्ते में पॉजिटिव हो गया है। इतिहास यह बताता है कि जब-जब ऐसा होता है तो आर्थिक संकट देखने को मिलता है। 2007 का वित्तीय संकट (Financial Crisis), 2001 का रिसेशन (Recession) और यहां तक कि 1929 का ग्रेट डिप्रेशन (Great Depression) इसके उदाहरण हैं। आम तौर पर 10-2 स्प्रेड के पॉजिटिव होने के 6-24 महीने बाद रिसेशन शुरू होता है। 17 सितंबर, 2024 को 10-2 यील्ड स्प्रेड 0.06 फीसदी था। पॉजिटिव होने से पहले यह 112 हफ्तों तक निगेटिव में था, जिसकी शुरुआत जुलाई 2022 में हुई थी। हालांकि, यह ध्यान में रखना होगा कि यील्ड कर्व (10-2 स्प्रेड) भले ही एक स्ट्रॉन्ग इंडिकेटर है, लेकिन ऐसा नहीं है कि यह गलत नहीं हो सकता। यह सिर्फ एक संकेत देता है। इस बीच, मार्केट की नजरें अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में संभावित कमी पर लगी हुई हैं।
शिल्पा मेडिकेयर का शेयर 17 सितंबर को हल्की गिरावट के साथ 894 रुपये पर क्लोज हुआ। ब्रोकरेज फर्म Antique ने Shilpa Medicare के शेयरों को खरीदने की सलाह दी है। बुल्स का कहना है कि कंपनी एपीआई और जीएलपी-1 सेगमेंट्स में नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने वाली है। नॉन-ओंकोलॉजी एपीआई का बाजार बढ़ रहा है। कंपनी ने UniCycive के साथ सीडीएमओ एग्रीमेंट किया है। इससे शिल्पा मेडिकेयर की ग्रोथ अच्छी रहने की संभावना है। बेयर्स की दलील है कि अगर Unicycive एफडीए से एप्रूवल हासिल करने में नाकाम रहती है या मार्केट शेयर बढ़ाने में दिक्कत आती है तो इसका इसर शिल्पा मेडिकेयर पर पड़ सकता है। इसके अलावा एपीआई में कॉम्पटिशन बढ़ रहा है। कीमतें घट रही हैं।
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ओला इलेक्ट्रिक के शेयर 17 सितंबर को 9.7 फीसदी चढ़कर 118 रुपये पर बंद हुए। इसकी वजह यह है कि BofA और गोल्डमैन सैक्स ने Ola Electric के स्टॉक्स को कवर करना शुरू किया है। दोनों ने इस स्टॉक को खरीदने की सलाह दी है। बुल्स का कहना है कि कंपनी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में ग्रोथ का फायदा उठाने के लिहाज से मजबूत स्थिति में है। ग्राहकों की दिलचस्पी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स में बढ़ रही है। टू-व्हीलर्स मार्केट में बड़ा बदलाव लाने में ओला की टेक्नोलॉजी और कॉस्ट लीडरशिप का बड़ा योगदान हो सकता है। बेयर्स का कहना है कि ओला इलेक्ट्रिक को TVS Motor जैसी कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है।