Shrimp Stocks: झींगा कंपनियों के शेयरों को गुरुवार 3 अप्रैल को तगड़ा झटका लगा। अवंती फीड्स और एपेक्स फ्रोजन फूड्स के शेयर 17 फीसदी तक गिर गए। यह गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ ऐलानों के बाद आई है। ट्रंप ने भारत सहित दुनिया के तमाम देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया है। भारत पर उन्होंने 26% टैरिफ लगाया है। हालांकि इसमें फार्मा जैसे कुछ सेक्टर्स को फिलहाल के लिए राहत दी गई है।
ट्रंप ने 2 अप्रैल को व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया को टैरिफ चार्ट दिखाया। इसमें उन्होंने रत अमेरिकी वस्तुओं पर 52% तक टैरिफ लगाता है और इस वजह से अमेरिका को 26% 'डिस्काउंटेडे रेसिप्रोकल टैरिफ' लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
अवंती फीड्स के शेयर कारोबार के दौरान 17% गिरकर 733 रुपये प्रति शेयर के भाव पर आ गए। कंपनी ने दिसंबर तिमाही के नतीजों के बाद निवेशकों को दिए एक प्रेजेंटेशन में बताया था कि उसके रेवेन्यू का 69% हिस्सा (एक साल पहले 82%) नॉर्थ अमेरिका से आता है। वहीं 17% हिस्सा यूरोप से और 14% एशिया से आता है।
अमेरिका, कंपनी का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। FY24 में कंपनी के कुल निर्यात में 64% हिस्सा अमेरिका का था। कंपनी ने दिसंबर तिमाही के नतीजों के बाद निवेशकों को दिए प्रेजेंटेशन में कंपनी ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका, यूरोपीय संघ और दक्षिण-पूर्व एशिया में मांग घटने से भारतीय झींगा एक्सपोर्ट को नुकसान होगा।
कोस्टल कॉर्प का शेयर भी % गिरकर ₹38.16 प्रति शेयर पर आ गए, जिससे कंपनी में पिछले तीन दिनों से जारी बढ़त का सिलसिला थम गया।
भारतीय झींगा का सबसे बड़ा खरीदार है अमेरिका
अमेरिका अभी भी भारत का सबसे बड़ा झींगा एक्सपोर्ट मार्केट बना हुआ है। भारत का कुल झींगा निर्यात 5.6 अरब डॉलर का है, जिसमें से 2.4 अरब डॉलर केवल अमेरिका को निर्यात किया जाता है। अमेरिकी बाजार में भारतीय झींगा की 40% हिस्सेदारी है। इसमें से काफी झींगा पहले लैटिन अमेरिकी देशों में प्रोसेस होने के लिए जाता है और फिर वहां से अमेरिका पहुंचता है।
भारत का झींगा उत्पादन और निर्यात
भारत में लगभग 100,000 झींगा फार्म हैं, जिनमें से अधिकतर आंध्र प्रदेश में स्थित हैं। वित्त वर्ष 2023 में भारत ने रिकॉर्ड 17,35,286 टन सीफूड का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 63,969.14 करोड़ रुपये (8.09 अरब डॉलर) रही। सीफूड में सबसे अधिक एक्सपोर्ट, फ्रोजन झींगा का होता है और अमेरिका व चीन इसके सबसे बड़े खरीदार है।
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