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इस साल ब्लू-चिप शेयरों ने मारी बाजी; स्मॉलकैप, मिडकैप स्टॉक्स रह गए पीछे; आगे के लिए कैसा है आउटलुक

मिडकैप इंडेक्स उन कंपनियों को ट्रैक करता है, जिनकी मार्केट वैल्यू औसतन ब्लू-चिप कंपनियों का पांचवां हिस्सा होती है, जबकि स्मॉलकैप कंपनियां उस यूनिवर्स का लगभग दसवां हिस्सा होती हैं। स साल वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर कमाई की विजिबिलिटी वाले लार्जकैप शेयरों पर फोकस किया

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Dec 25, 2025 पर 1:37 PM
इस साल ब्लू-चिप शेयरों ने मारी बाजी; स्मॉलकैप, मिडकैप स्टॉक्स रह गए पीछे; आगे के लिए कैसा है आउटलुक
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स के लिए आउटलुक सावधानी के साथ आशावादी बना हुआ है।

इस साल बढ़त के मामले में छोटे स्टॉक बड़े ब्लू-चिप शेयरों के मुकाबले पीछे रह गए। एनालिस्ट्स ने 2025 में स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स के खराब प्रदर्शन का कारण 2023 और 2024 में उनके असाधारण प्रदर्शन के बाद मार्केट का नॉर्मल होना बताया। दो सालों की मजबूत रैली के बाद हाई वैल्यूएशन के कारण छोटे शेयरों में प्रॉफिट-बुकिंग हुई। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि रुपये के कमजोर होने, अमेरिका-भारत के बीच ट्रेड पर बातचीत को लेकर चिंता और विदेशी फंड के लगातार बाहर जाने से भी ब्रॉडर मार्केट में तेज रिस्क-ऑफ रिएक्शन हुआ।

आगे की राह को लेकर मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स के लिए आउटलुक सावधानी के साथ आशावादी बना हुआ है। जैसे-जैसे वैल्यूएशन कम होगी और कमाई की विजिबिलिटी बेहतर होगी, भारत की स्थिर GDP ग्रोथ और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी के सपोर्ट से चुनिंदा मौके सामने आएंगे।

इस साल 24 दिसंबर तक BSE मिडकैप गेज मामूली रूप से 360.25 अंक या 0.77 प्रतिशत बढ़ा। हालांकि, BSE स्मॉलकैप इंडेक्स 3,686.98 अंक या 6.68 प्रतिशत गिर गया। इसके उलट 30-शेयरों वाला BSE सेंसेक्स इस अवधि के दौरान 7,269.69 अंक या 9.30 प्रतिशत बढ़ा।

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