Delhivery Share Price: लॉजिस्टिक्स प्रदाता डेल्हीवरी (Delhivery) ने शनिवार 5 अप्रैल को ऐलान किया कि वह ₹1,407 करोड़ तक के नकद सौदे में प्रतिद्वंद्वी ईकॉम एक्सप्रेस (Ecom Express) का अधिग्रहण कर रही है। डेल्हीवरी इसमें 99.4% हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी। भारत के खंडित लॉजिस्टिक्स सेक्टर में सबसे बड़े कंसोलिडेशन मूव्स में से एक है। इसे एक रणनीतिक कदम के रूप में देखते हुए, लेन-देन की रूपरेखा से पता चलता है कि यह एक संकटकालीन बिक्री भी हो सकती है। सॉफ्टबैंक उम्मीद से काफी कम वैल्यूएशन पर एक और भारतीय निवेश से बाहर निकल गया है।
बोर्ड द्वारा अनुमोदित लेन-देन के तहत ईकॉम एक्सप्रेस छह महीने के भीतर डेल्हीवरी की सहायक कंपनी बन जाएगी। हालांकि ये रेगुलेटर की मंजूरी के अधीन है।
डेल्हीवरी ने अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में एक मजबूत वित्तीय और ऑपरेटिंग स्थिति बनाए रखी है। डेल्हीवरी ने कहा कि अधिग्रहण से कॉस्ट एफिसिएंसी बढ़ाने, ग्राहक सेवा में सुधार करने और ऑपरेशन, रोबोटिक्स, ड्रोन और इलेक्ट्रिक वाहनों में निवेश में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
2012 में स्थापित, ईकॉम एक्सप्रेस ने एक बार सॉफ्टबैंक, सीडीसी ग्रुप (अब ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट) और पार्टनर्स ग्रुप सहित प्रमुख निवेशकों को आकर्षित किया था।
प्रतिस्पर्धा बढ़ती गई और कंपनी की फंडिंग खत्म होती गई
वित्त वर्ष 24 में, ईकॉम एक्सप्रेस ने ₹2,607 करोड़ का रेवन्यू दर्ज किया। लेकिन कंपनी मुनाफे के मोर्चे पर पीछे रही। जैसे-जैसे प्रतिस्पर्धा बढ़ती गई और फंडिंग खत्म होती गई। कंपनी को अपनी वृद्धि को बनाए रखने में संघर्ष करना पड़ा।
लेकिन अधिग्रहण की टाइमिंग से सवाल उठता है। ईकॉम एक्सप्रेस सार्वजनिक लिस्टिंग की तैयारी कर रहा था, लेकिन इसके खुलासे की जांच के बाद इसने आईपीओ योजनाओं को चुपचाप टाल दिया गया।
डेल्हीवरी ने पहले ईकॉम एक्सप्रेस द्वारा अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में प्रस्तुत ऑपरेशन और वित्तीय मेट्रिक्स को चुनौती दी थी, जिसमें गलत बयानी का आरोप लगाया गया था।
अब डेल्हीवरी उसी कंपनी का अधिग्रहण कर रही है। वह भी ऐसे समय में जब आईपीओ की गति धीमी हो गई है।
डेल्हीवरी को इन वजहों से होगा फायदा
डेल्हीवरी को बेहतर रूट डेनसिटी, बेहतर एसेट युटिलाइजेशन और ई-कॉमर्स वॉल्यूम पर अधिक नियंत्रण से लाभ होगा।
सॉफ्टबैंक, जापानी निवेशक, जिसने लगभग एक दशक पहले ईकॉम एक्सप्रेस में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल की थी। माना जाता है कि उसने कंपनी में करीब 125 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। ₹1,407 करोड़ के सौदे में इसके हिस्से के परिणामस्वरूप घाटा होने की उम्मीद है, हालांकि भुगतान का ब्योरा नहीं बताया गया है।
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)