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Stock Market Crash: 5 वजहों से Sensex की तगड़ी पिटाई, Repo Rate ऊपर तो Nifty नीचे

Stock Market Crash: फरवरी 2023 के बाद से पहली बार रेपो रेट में बढ़ोतरी ने आज मार्केट तोड़ दिया। सेंसेक्स (Sensex) करीब 600 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी (Nifty 50) भी फिसलकर 22550 के नीचे आ गया। जानिए मार्केट में गिरावट की पांच मुख्य वजह और रेपो रेट में बढ़ोतरी ने किस सेक्टर पर भारी दबाव बनाया

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Oct 07, 2026 पर 4:09 PM
Stock Market Crash: 5 वजहों से Sensex की तगड़ी पिटाई, Repo Rate ऊपर तो Nifty नीचे
एक कारोबारी दिन पहले 06 अक्टूबर को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स 685.34 प्वाइंट्स यानी 0.95% की बढ़त के साथ 73,067.81 और निफ्टी भी 220.35 प्वाइंट्स यानी 0.98% की मजबूती के साथ 22,776.10 पर बंद हुआ था। आज ये लाल खुले।

Stock Market Crash: रेपो रेट में बढ़ोतरी के साथ-साथ महंगाई के अनुमान में भी बढ़ोतरी ने मार्केट को आज तोड़ दिया। वैसे रेपो रेट में बढ़ोतरी के आसार पहले से ही थे तो ऐलान से पहले ही आज मार्केट में दबाव दिखने लगा था लेकिन रेपो रेट में बढ़ोतरी और इनफ्लेशन आउटलुक पर यह और नीचे आ गया। सेंसेक्स करीब 600 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22550 के नीचे आ गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर आज मिला-जुला रुझान दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक की गिरावट आई तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब आधे फीसदी की बढ़त रही। ओवरऑल बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप आज ₹3 लाख करोड़ से अधिक घट गया।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें आज 07 अक्टूबर को सेंसेक्स (Sensex) 429.11 प्वाइंट्स यानी 0.59% की गिरावट के साथ 72,638.70 और निफ्टी (Nifty) भी 173.05 प्वाइंट्स यानी 0.76% की फिसलन के साथ 22,603.05 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 599.09 प्वाइंट्स टूटकर 72,468.72 और निफ्टी भी 229.80 प्वाइंट्स गिरकर 22,546.30 तक आ गया था।

Stock Market Crash: ये है वजह

दरों में बढ़ोतरी

आरबीआई ने ब्याज दरों में 25 बीपीएस की बढ़ोतरी तो मार्केट फिसल गया। फरवरी 2023 के बाद से पहली बार इसमें बढ़ोतरी हुई है। ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल का कहना है कि ब्याज दरें बढ़ने से नॉन-बैंक लेंडर्स के मार्जिन पर दबाव पड़ेगा क्योंकि लोन से होने वाली कमाई की तुलना में फंडिंग की लागत तेजी से बढ़ेगी। इसका असर फिक्स्ड-रेट वाले वेईकल और माइक्रोफाइनेंस लेंडर्स पर अधिक होगा, जबकि फ्लोटिंग-रेट वाले हाउसिंग फाइनेंसर की स्थिति इसकी तुलना में बेहतर होगी।

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