Stock Market Fall: भारतीय शेयर बाजार पर मंदडियों की पकड़ और मजबूत होती दिख रही है। सोमवार को दलाल स्ट्रीट पर निवेशक 'लहूलुहान और घायल' नजर आए। दिन के कारोबार के दौरान निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ।
Stock Market Fall: भारतीय शेयर बाजार पर मंदडियों की पकड़ और मजबूत होती दिख रही है। सोमवार को दलाल स्ट्रीट पर निवेशक 'लहूलुहान और घायल' नजर आए। दिन के कारोबार के दौरान निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ।
चीन ने अप्रैल 2020 के बाद पहली बार सोमवार को लेंडिंग रेट में कटौती की, जिसके बाद ग्लोबल बाजार में कमजोरी देखी गई। ग्लोबल बाजारों में इस बिकवाली का भारतीय शेयर बाजारों पर दबाव देखने को मिल रहा है। इसके अलावा ओमीक्रोन के बढ़ते मामलों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
कई यूरोपीय देशों में कोविड को लेकर नए सिरे से लागू पाबंदियां, विदेशी निवेशकों (FII) की तरफ से लगातार भारी बिकवाली और दुनिया के कुछ प्रमुख सेंट्रल बैंकों की तरफ से नीतियों में कड़ाई और लिक्विडिटी घटाने के उपाय उठाने के चलते भी मार्केट सेंटीमेंट प्रभावित हुआ है।
अप्रैल 2021 के बाद सबसे बड़ी गिरावट
सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों में अप्रैल 2021 के बाद से अब तक की सबसे बड़ी गिरावट आई। दोपहर 1.02 बजे, BSE सेंसेक्स करीब 1,849 अंक या 3.24 पर्सेंट का गोता लगाकर 55,162.50 अंक पर कारोबार कर रहा था। 19 अक्टूबर को अपना रिकॉर्ड हाई छूने के बाद से अब तक सेंसेक्स में करीब 11 पर्सेंट की गिरावट आ चुकी है। वहीं निफ्टी-50 सोमवार को 566.5 अक या 3.3 पर्सेंट टूटकर 16,418.70 अंक पर कारोबार कर रहा था। 19 अक्टूबर के रिकॉर्ड हाई के बाद से अब तक निफ्टी-50 में 11.65 पर्सेंट की गिरावट आ चुकी है।
दोपहर 1.02 बजे तक शेयर बाजार में निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपये डूब चुके थे। इसके साथ ही BSE का मार्केट कैपिटलाइजेशन 259.4 लाख करोड़ रुपये से घटकर 250 लाख करोड़ रुपये पर आ गया था।
पिछले दो महीनों में निवेशकों की संपत्ति करीब 25 लाख करोड़ रुपये घट चुकी है और इस दौरान BSE का मार्केट कैपिटलाइजेशन 274.69 लाख करोड़ रुपये से घटकर 250 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है।
इन चार फैक्टर्स ने बाजार को घायल कर दिया
1. ओमीक्रॉन के बढ़ने की चिंता
कोविड -19 के तेजी से फैलने वाले इस वैरिएंट ने निवेशकों को डराना जारी रखा क्योंकि यूरोप के अधिकांश देश इसको नियंत्रित करने के लिए परेशान रहे। मार्केट एस्कपर्ट्स का मानना है कि सामान्य होती वैश्विक अर्थव्यवस्था के ठीक एक साल बाद एक और सख्त लॉकडाउन की संभावना आर्थिक सुधार को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
2. ग्लोबल स्पिलऑफ (दुनिया भर के बाजारों में गिरावट)
वॉल स्ट्रीट शुक्रवार को निचले स्तर पर बंद हुआ जबकि सभी तीन प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स फेड द्वारा बुधवार को मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए 2022 के अंत तक तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत के बाद गिरावट के साथ बंद हुए।
3. केंद्रीय बैंकों की सख्त नीति
वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों के कठोर रुख ने भी एशिया में इक्विटी बाजारों पर असर डाला है। फेड ने महामारी के दौरान प्रोत्साहन देने के अपने रुख से पीछे हटने का विचार व्यक्त किये जाने पर कई केंद्रीय बैंकों ने अपने-अपने देशों में मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए दरें बढ़ाई हैं।
4. FII की लगातार बिकवाली
विकसित बाजारों में केंद्रीय बैंकों द्वारा नीतियों को सख्त करने के परिणामस्वरूप भारत और अन्य उभरते बाजारों में एफआईआई द्वारा बेरोकटोक और लगातार बिकवाली देखने को मिली है। केवल दिसंबर महीने में FII ने कैश मार्केट में 26,000 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध बिकवाली की जो इस साल एक महीने में की गई सबसे अधिक बिक्री है।
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