15 मई को खत्म हुए कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स 2,090.20 अंक या 2.7 प्रतिशत टूट गया। निफ्टी 532.65 अंक या 2.2 प्रतिशत लुढ़का। शुक्रवार, 15 मई को सेंसेक्स 160.73 अंक या 0.21 प्रतिशत गिरकर 75,237.99 पर बंद हुआ था। निफ्टी 46.10 अंक या 0.19 प्रतिशत गिरकर 23,643.50 पर बंद हुआ। बाजार में दो दिन की तेजी के बाद गिरावट आई। इसके पीछे अहम कारण थे- प्रॉफिट बुकिंग, कमजोर रुपया, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने की चिंता, एशियाई बाजारों की गिरावट। अब 18 मई से शुरू हो रहे सप्ताह में बाजार की चाल किन अहम फैक्टर्स के आधार पर तय होगी, आइए जानते हैं...
निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान संघर्ष और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर बनी रहेगी। अमेरिका-ईरान विवाद से जुड़ी हर नई जानकारी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी किसी भी घटना पर वैश्विक बाजारों की नजर रहेगी। यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की दिशा में कोई सकारात्मक संकेत मिलता है तो बाजार में तेजी लौट सकती है। वहीं तनाव बढ़ने या कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में शेयर बाजार, मुद्रा बाजार और कमोडिटी बाजारों में भारी दबाव देखने को मिल सकता है।
ब्रेंट कच्चे तेल का दाम बाजार की दिशा तय करने वाला एक अहम कारक रहेगा। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत बढ़कर 109.2 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। कीमत और चढ़ने पर बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
पिछले सप्ताह भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर से नीचे फिसल गया। रुपये की इस कमजोरी ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में रुपये की चाल बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली और चालू खाते के घाटे (कैड) में वृद्धि से रुपये पर दबाव बना हुआ है। 15 मई को यह गिरकर 96.14 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। लेकिन बाद में 17 पैसे की गिरावट के साथ 95.81 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। विजयकुमार का मानना है कि अगर FPI की ओर से सेलिंग जारी रहती है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो रुपये में और कमजोरी आ सकती है।
कंपनियों के तिमाही नतीजों का असर भी शेयरों की चाल पर दिखाई देगा। नए सप्ताह में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL), गेल और एनटीपीसी समेत 644 कंपनियां अपने वित्तीय नतीजे घोषित करेंगी।
वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली का सिलसिला जारी है। FPI ने मई में अब तक भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से 27,048 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। NSDL के आंकड़ों के अनुसार, इसके साथ ही 2026 में अब तक FPI कुल 2.2 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत समेत उभरते बाजारों में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई है। इसके पीछे वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर अनिश्चितता, विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव कारण हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर रहने से विकसित बाजारों में निवेश ज्यादा आकर्षक हो गया है।
इन घटनाक्रमों पर भी रहेगी नजर
मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नजर चीन, अमेरिका और भारत में नए सप्ताह में जारी होने वाले आर्थिक आंकड़ों पर भी रहेगी। इसके अलावा फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक का ब्योरा भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।