विदेशी निवेशक लौटेंगे वापस? आएंगे तो कहां लगाएंगे पैसे, ये है एक्सपर्ट्स का रुझान

ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने के अमेरिकी फेड (US Fed) के फैसले का मार्केट पर पॉजिटिव असर दिखा और घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) गुरुवार 2 नवंबर को अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि क्या विदेशी निवेशक अब भारतीय मार्केट में वापसी करेंगे? पिछले तीन महीने से विदेशी निवेशकों ने तगड़ी बिकवाली की है

अपडेटेड Nov 03, 2023 पर 9:07 AM
अगस्त से विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) ताबड़तोड़ बिकवाली कर रहे हैं और उन्होंने 76,369.42 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं।

ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने के अमेरिकी फेड (US Fed) के फैसले का मार्केट पर पॉजिटिव असर दिखा और घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) गुरुवार 2 नवंबर को अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और उसके अध्यक्ष जेरोम पॉवेल की नरम टिप्पणी ने मार्केट के लिए बेहतर माहौल तैयार किया। मार्केट ने जेरोम पॉवेल के बयान को इस तरीके से लिया कि इंफ्लेशन हाई लेवल पर है लेकिन लॉन्ग टर्म इंफ्लेशन की उम्मीद स्थायी बनी हुई हैं। इसके चलते ट्रेजरी यील्ड्स तेजी से गिर गया और शेयर मार्केट उछल गया क्योंकि एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि अमेरिकी फेड अब रेट हाइक नहीं करेगा। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि क्या विदेशी निवेशक अब भारतीय मार्केट में वापसी करेंगे? पिछले तीन महीने से विदेशी निवेशकों ने तगड़ी बिकवाली की है।

अमेरिकी फेड के फैसले का भारतीय शेयरों के लिए क्या है मतलब

भारतीय शेयर मार्केट में 2 नवंबर को अच्छी तेजी दिखी और सेंसेक्स-निफ्टी इंट्रा-डे में तो लगभग एक फीसदी उछल गए। वेंचुरा सिक्योरिटीज के विनीत बोलिंजकर का कहना है कि अगर अमेरिकी इकॉनमी में अधिक दर पर ब्याज नहीं मिलता है तो हाई रिटर्न के लिए निवेशक उभरते बाजारों में आ सकते हैं। विनीत के मुताबिक कि भारतीय बाजारों के लिए यह बुलिश संकेत है क्योंकि क्योंकि ब्याज दरों में किसी भी गिरावट का मतलब है कि उभरते बाजारों में अधिक पैसा आएगा और इसका सबसे अधिक फायदा भारत को मिलेगा।


हालांकि बोनान्जा पोर्टफोलियो के रिसर्च एनालिस्ट ओमकार कामटेकर के मुताबिक लॉन्ग टर्म में सावधानी बरतनी होगी। इसकी वजह ये है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था उम्मीदों से आगे बढ़ रही है, मिडिल ईस्ट में राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता बढ़ गई है, इसके अलावा भारत में विधानसभा चुनावों का असर भी दिख रहा है। इसके अतिरिक्त, लंबे समय तक दरें ऊंची रहने से मंदी की आशंकाएं बढ़ सकती हैं, जिससे अस्थिरता बढ़ सकती है।

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क्या लौटेंगे FII?

अगस्त से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ताबड़तोड़ बिकवाली कर रहे हैं और उन्होंने 76,369.42 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। अमेरिकी फेड के रुख का तत्काल असर 10 साल वाले अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर दिखा जो 4.926 फीसदी से गिरकर 4.719 फीसदी पर गिर गया। डॉलर इंडेक्स DXY भी थोड़ा फीका हुआ है और एनालिस्ट्स के मुताबिक इसमें और नरमी आएगी। ओमकार के मुताबिक इससे विदेशी निवेशक उभरते बाजारों की तरफ तेजी से लौट सकते हैं और भारत उनका मनपसंदीदा स्थान होगा। इसकी वजह ये भी है कि भारतीय शेयर रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। एक्सिस सिक्योरिटीज पीएमएस के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर नवीन कुलकर्णी 6 से 12 महीने में विदेशी निवेश का माहौल पॉजिटिव बना रह सकता है।

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किस सेक्टर में आ सकता है निवेश

अब अगर बात करें तो विदेशी निवेशक किस सेक्टर मे में निवेश कर सकते हैं तो ओमकार के मुताबिक NBFC में दिलचस्पी दिख सकती है। निजी कैपेक्स के पटरी पर आने से कैपिटल गुड्स और इंफ्रा सेगमेंट्स में भी खरीदारी का रुझान दिख रहा है। विनीत के मुताबिक अगले साल वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने पर भारतीय वैल्यूएशन में और सुधार दिखेगा। इससे साइक्लिकल, इंफ्रा, मैनुफैक्चरिंग, डिफेंस और रेलवे सेक्टर के शेयरों में और निवेश आएगा। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक वैल्यूएशन और ग्रोथ के लिहाज से बैंकों मं अच्छी खरीदारी का मौका बन रहा है तो आईटी शेयर शानदार वापसी कर सकते हैं क्योंकि आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती हो सकती है।

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