Share Market Fall: शेयर बाजार में इन 5 कारणों से भारी उतार-चढ़ाव, इसलिए दबाव में हैं सेंसेक्स-निफ्टी

Stock Market: शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव का सिलसिला सोमवार 21 अक्टूबर को भी जारी रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ खुले, लेकिन फिर तुरंत ही यह उछलकर हरे निशान में चले गए। बैंकिंग और आईटी शेयरों में बढ़त के चलते इनमें तेजी देखने को मिली। हालांकि, फिर आधे घंटे बाद ही दोनों इंडेक्सों ने अपनी बढ़त खो दी। आइए जानते हैं इस उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के पीछे 5 अहम कारण क्या रहे-

अपडेटेड Oct 21, 2024 पर 1:53 PM
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विदेशी निवेशक (FIIs) अक्टूबर में अबतक 80,217 करोड़ की रिकॉर्डतोड़ बिकवाली कर चुके है

Stock Market: शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव का सिलसिला सोमवार 21 अक्टूबर को भी जारी रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ खुले, लेकिन फिर तुरंत ही यह उछलकर हरे निशान में चले गए। बैंकिंग और आईटी शेयरों में बढ़त के चलते इनमें तेजी देखने को मिली। हालांकि, फिर आधे घंटे बाद ही दोनों इंडेक्सों ने अपनी बढ़त खो दी। दोपहर 12.15 बजे, सेंसेक्स 377 अंक या 0.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,847 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 158 अंक या 0.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,695 पर था। आइए जानते हैं इस उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के पीछे 5 अहम कारण क्या रहे-

1. FIIs की ओर से रिकॉर्डतोड़ निकासी

विदेशी निवेशकों (FIIs) लगातर भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। सिर्फ इस महीने अक्टूबर में वह अबतक करीब 80,217 करोड़ रुपये की रिकॉर्डतोड़ बिकवाली कर चुके है। यह किसी भी एक महीने में उनकी ओर से की गई अबतक की सबसे अधिक बिकवाली है। कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने भारतीय बाजार से किसी एक महीने में इतनी बड़ी निकासी नहीं की थी। इसके चलते शेयर बाजार लगातार दवाब में है।

2. हाई वैल्यूएशन


शेयर बाजार में बिकवाली का एक और कारण हाई वैल्यूएशन का कहना है। मार्केट एनालिस्टस का कहना है कि बाजार में पिछले 2-3 सालों से शानदार तेजी देखने को मिली थी। इसके चलते खासतौर से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर काफी महंगे हो गए हैं। ऐसे में निवेशक अब इन शेयरों में मुनाफावसूली कर रही है। उनका कहना है कि आने वाले महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप की तुलना में, लार्जकैप का प्रदर्शन बेहतर रह सकता है।

3. चीन के आर्थिक प्रोत्साहन

चीन अपनी मंद होती अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए लगातार नए आर्थिक प्रोत्साहनों का ऐलान कर रहा है। खासतौर से वह अपनी प्रॉपर्टी मार्केट को फिर से रिवाइव करने के प्रयासों में इन प्रोत्साहनों ने विदेशी निवेशकों का भी ध्यान खींचा है। कई एक्सपर्ट्स इसके चलते विदेशी निवेश के भारत के शेयर बाजार से खिसककर चीन में जाने का अंदेशा जता रहे हैं।

4. मिडिल ईस्ट तनाव

मिडिल ईस्ट में छिड़ा तनाव जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा है। इसके चलते क्रूड ऑयल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ा है। बाजार को आशंका है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है तो फिर इससे पूरे ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।

5. कमजोर तिमाही नतीजे

अभी तक जिन कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे आए हैं, उनमें से अधिकतर ने दलाल स्ट्रीट को निराश किया है। खासतौर से बड़ी कंपनियों के नतीजों ने। इसके चलते भी मार्केट सेंटीमेंट कमजोर हुआ है और बिकवाली बढ़ी है।

एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?

सोविलो इनवेस्टमेंट मैनेजर्स LLP के फंड मैनेजर और कोफाउंडर संदीप अग्रवाल ने कहा, "ग्लोबल स्तर पर, विकास और महंगाई नियंत्रण के मामले में भारत से बेहतर कोई बाजार नहीं है।" उन्होंने कहा, "अमेरिका अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन वह इस समय चुनाव जोखिमों और डेट-टू-जीडीपी के ऊंचे रेशियो का सामना कर रहा है। इससे डॉलर के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। जापान में लगभग कोई ग्रोथ नहीं दिख रहा है। वही चीन की अपनी समस्याएं हैं जो चाइना प्लस वन के कारण और भी बदतर हो गई हैं। मिडिल ईस्ट संकट के कारण यूरोप आंशिक रूप से पंगु हो गया है। भारत, हालांकि महंगा है, लेकिन आकर्षक बना हुआ है। वैसे भी ऐतिहासिक रूप से अच्छे रिटर्न वाले सुरक्षित बाजार हमेशा प्रीमियम पर कारोबार करते रहे हैं। हालांकि बाजार में तत्काल रिएक्शन जैसे जोखिम देखने को मिल सकते हैं, लेकिन मैं हाई वैल्यूएशन को जोखिम के रूप में नहीं देखता।"

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