Stock market views : डाओ जोन्स फ्यूचर्स और भारतीय स्टॉक मार्केट समेत ग्लोबल मार्केट सोमवार को नए हफ्ते की शुरुआत करेंगे। लेकिन अभी US-ईरान युद्ध में कमी के कोई संकेत नहीं दिख है। इस बीच, कुवैत, UAE, सऊदी अरब, इराक और कतर ने अपने तेल प्रोडक्शन में कुछ रुकावट की बात कही है। कतर से दुनिया की लगभग 20% LNG सप्लाई पूरी तरह से रुक गई है। ये सभी संकेत बताते हैं कि कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को या अगले कुछ सेशन में 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ऐसे में बाजार के जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारतीय शेयर बाजार नीचे जा सकता है। निफ्टी 50 इंडेक्स इस हफ्ते 24000 के नीचे गिर सकता है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन पर ग्लोबल मार्केट ने ज़ोरदार रिएक्शन दिया है। घरेलू मार्केट में भारी गिरावट देखने को मिल रही। तेल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं है। जबकि भारतीय रुपया कमज़ोर हुआ है,जो क्रूड ऑयल की सप्लाई में लंबे समय से बनी रुकावटों की से जुड़ी चिंताओं का असर दिखा रहा है। कच्चा तेल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक ज़रूरी इनपुट है। तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी इन्वेस्टर सेंटिमेंट पर असर डाल सकती है और भारत के दोहरे घाटे,महंगाई की चाल और RBI के मॉनेटरी रुख पर बुरा असर डाल सकती है। अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और मज़बूत डॉलर ने FII को घरेलू इक्विटी बाजार में बिकवाली के लिए प्रेरित किया है।
नायर ने आगे कहा कि शुक्रवार को बड़े पैमाने पर बिक्री हुई। जिसमें रियल्टी,बैंक और ऑटो ने सबसे खराब प्रदर्शन किया। हालांकि बदलते जियोपॉलिटिकल माहौल और बढ़े हुए बजट खर्च के कारण डिफेंस सेक्टर को कुछ फ़ायदा हुआ। इंडिया VIX ऊपर गया है,जो मार्केट में बढ़ती अनिश्चितता और रिस्क से बचने की भावना का संकेत है।
ऐसे माहौल में निवेशक ट्रेडिशनल सेफ-हेवन एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं और ज़्यादा क्लैरिटी का इंतज़ार करते हुए सावधानी बरत रहे हैं। उम्मीद है कि होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल को लेकर भरोसा मिलने से मार्केट सेंटिमेंट को स्टेबल करने में मदद मिलेगी। ऐसे में निवेशकों को सलाह होगी कि वे पैनिक में बिकवाली करने से बचें और अगले कुछ हफ़्तों तक डिसिप्लिन्ड,लॉन्ग-टर्म नज़रिया अपनाएं और सब्र रखें। मौजूदा प्राइस लेवल मीडियम से लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स के लिए एक स्ट्रेटेजिक एंट्री प्वाइंट दे सकते हैं।
बोनान्ज़ा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे मार्केट में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है क्योंकि इन्वेस्टर घरेलू कॉर्पोरेट न्यूज़,ग्लोबल मैक्रो सिग्नल और करेंसी डायनामिक्स के मिले-जुले असर को समझ रहे हैं। डिफेंस सेक्टर में तेज़ी कैपिटल गुड्स और सरकारी खर्च से जुड़े स्ट्रेटेजिक सेक्टर में खास मौके का संकेत दे रही है। इन्वेस्टरों को FII की एक्टिविटी, रुपये की चाल और किसी भी पॉलिसी अनाउंसमेंट पर नज़र रखनी चाहिए जो जल्द ही मार्केट के लिए ट्रिगर का काम कर सकती हैं।
इस समय सावधानी बरते हुए डिफेंस,IT और एनर्जी सेक्टर के क्वालिटी लार्ज-कैप और चुनिंदा मिड-कैप शेयरों पर फोकस करते हुए,ग्लोबल रिस्क लेने की क्षमता में किसी भी बदलाव के प्रति अलर्ट रहें।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP रिसर्च,अजीत मिश्रा का कहना है कि निफ्टी इंडेक्स में तेज़ उतार-चढ़ाव और बढ़ी हुई वोलैटिलिटी एक सतर्क माहौल की ओर संकेत कर रहे हैं। 24,300 पर स्थित हाल के सबसे निचले स्तर से नीचे जाने पर इंडेक्स तेज़ी से 24,000 के लेवल की ओर जा सकता है। इंडेक्स में काफ़ी ज्याद वेटेज रखने वाले बैंकिंग पैक में नई कमज़ोरी भी नेगेटिव रुझान को बढ़ा रही है। हालांकि,फार्मा, मेटल, PSE और डिफेंस जैसे कुछ सेक्टर और थीम में मज़बूती से रोटेशनल बेसिस पर खरीदारी के मौके मिलते रहे हैं। मौजूदा सेटअप को देखते हुए,हमें सतर्क रुख बनाए रखते हुए मार्केट के स्थिर होने तक सख़्त रिस्क मैनेजमेंट पर फोकस करते हुए चुनिंदा क्वालिटी शेयरों पर ही फोकस करना चाहिए।
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