Stock Markets: एक अच्छी शुरुआत के बाद क्या अप्रैल में Nifty कायम रख पाएगा ये बढ़त?

Stock Markets: 2010 के बाद से अब तक निफ्टी ने अप्रैल में 7 बार पॉजिटिव रिटर्न दिया है, हालांकि औसत गेन सिर्फ 1.6 फीसदी है। इसमें अप्रैल 2020 एक अपवादा है, जब मार्च में COVID-19 के चलते आई 23 फीसदी गिरावट के बाद शेयरों में जोरदार उछाल देखने को मिला था। अप्रैल 2020 में निफ्टी में 14 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली थी। अगर अप्रैल 2020 के इस बंपर रिटर्न को अलग कर दिया जाये तो ऊपर बताया गया औसत गेन मात्र 0.5 फीसदी रह जाएगा

अपडेटेड Apr 01, 2023 पर 11:36 AM
घरेलू बाजार में अदाणी मामले ने निवेशकों का मूड खराब कर दिया है। तमाम फंड मैनेजरों का कहना है कि अदाणी धमाके की धूल अभी भी पूरी तरह से बैठी नहीं है

Stock Markets: बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 इंडेक्स में 31 मार्च को 1.6 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। इससे अप्रैल एफएंडओ सिरीज की शुरुआत बढ़त के साथ हुई है। हैवीवेट रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बाजार की कल की तेजी में अहम योगदान दिया। अब वित्तवर्ष 2023 समाप्त हो गया है और एक नया वित्तवर्ष शुरू हो गयाहै। ऐसे में सवाल है कि क्या अप्रैल में निफ्टी में रैली देखने को मिल सकती है और बाकी बचे साल की दिशा तय कर सकता है? लेकिन आंकड़े कुछ अलग ही संकेत दे रहे हैं।

2010 के बाद से अब तक निफ्टी ने अप्रैल में 7 बार पॉजिटिव रिटर्न दिया

2010 के बाद से अब तक निफ्टी ने अप्रैल में 7 बार पॉजिटिव रिटर्न दिया है, हालांकि औसत गेन सिर्फ 1.6 फीसदी है। इसमें अप्रैल 2020 एक अपवादा है, जब मार्च में COVID-19 के चलते आई 23 फीसदी गिरावट के बाद शेयरों में जोरदार उछाल देखने को मिला था। अप्रैल 2020 में निफ्टी में 14 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली थी। अगर अप्रैल 2020 के इस बंपर रिटर्न को अलग कर दिया जाये तो ऊपर बताया गया औसत गेन मात्र 0.5 फीसदी रह जाएगा।


शॉर्ट कवरिंग रैली मुमकिन

एनालिस्ट्स का अनुमान है कि अप्रैल में एक शॉर्ट कवरिंग रैली देखने को मिल सकती है। मार्च का निफ्टी का रोलओवर 74 फीसदी है। ये 75.4 फीसदी के तिमाही औसत से थोड़ा ही कम है। ऑप्शन के मोर्चे पर नजर डालें तो आउट ऑफ मनी 17000 के स्ट्राइक प्राइस वाले पुट ऑप्शन में सबसे ज्यादा ओपन इन्टरेस्ट देखने को मिला है। उसके बाद 16500 के स्ट्राइक प्राइस वाले डीप आउट ऑफ मनी पुट ऑप्शन में 2681300 कॉन्ट्रैक्ट देखने को मिले हैं।

बाजार में एक टिकाऊ रैली की संभावना नहीं

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के वी के विजयकुमार का कहना है कि बाजार में जरूरत से ज्यादा बिकवाली हो चुकी है और अब इसमें निकट भविष्य में शॉर्ट कवरिंग और रणनीतिक तेजी आ सकती है। हालांकि बाजार में एक टिकाऊ रैली की संभावना नहीं है क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशक फिर से ऊपरी स्तरों पर बिकवाली करते दिख रहे हैं।

मार्च में नेट बॉयर रहने के बाद भी एफआईआई ने 2023 में भारतीय इक्विटी मार्केट में 3.35 अरब डॉलर की बिकवाली की है। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, अप्रैल सीरीज की शुरुआत सबसे कम FII लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो के साथ हुई है। इंडेक्स फ्यूचर्स में FII लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो मार्च सीरीज में 7.75 फीसदी से लेकर 26.03 फीसदी तक रहा और अब यह अपने सबसे निचले स्तर के करीब है।

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Q4 में कंपनियों के नतीजे भी ब्लॉकबस्टर रहने की उम्मीद नहीं 

Q4 में कंपनियों के नतीजे भी ब्लॉकबस्टर रहने की उम्मीद नहीं है। निफ्टी में सबसे ज्यादा वेटेज रखने वाले बैंकिंग स्टॉक्स के मार्जिन पर दबाव रहने की संभावना है। तामं ग्लोबव दिक्कतों के चलते आईटी कंपनियों के रेवेन्यू पर भी दबाव देखने को मिल सकता है। खपत से जुड़े स्टॉक्स के लिए भी स्थितिां अच्छी नहीं दिख रही है।

एलकेपी सिक्योरिटीज के अविनाश पाठक का कहना है कि एफएमसीजी सेक्टर में मांग की स्थिति पिछली तिमाहियों की तरह ह बनी हुई है। ग्रामीण बाजारों में रिकवरी के कुछ अच्छे संकेत दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, मौसम की प्रतिकूल स्थिति इस रिकवरी में बाधा बन सकती है।

भारत ने अक्टूबर के अंत से अब तक अंडरपरफॉर्म किया है। इसके चलते दुनिया के दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले भारत के काफी महंगे हो चुके वैल्यूएशन प्रीमियम में काफी अच्छा करेक्शन देखने को मिला है। इसको देखते हुए मॉर्गन स्टेनली ने भारत की रेटिंग को अपग्रेड करके 'equal-weight'कर दिया है।

वैल्यूएशन अभी भी महंगा

हालांकि भारतीय इक्विटीज का वैल्यूएशन अभी भी लंबी अवधि के ऐतिहासिक औसत की तुलना में ज्यादा है। निफ्टी वर्तमान में 20.16x के 12 महीने के ट्रेलिंग पीई पर कारोबार कर रहा है, जो इसके 20x के लॉन्ग टर्म औसत से थोड़ा ज्यादा है।

बाजार में निवेशकों की भागीदारी में भी तेज गिरावट

वित्त वर्ष 2023 में बाजार में निवेशकों की भागीदारी में भी तेज गिरावट आई है। बढ़ती महंगाई और ब्याज दर, जियो पोलिटिकल तनाव और अमेरिकी बैंकों की विफलता के चलते निवेशक बाजार से बेरुखी करते दिख रहे हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक बीएसई और एनएसई के इक्विटी कैश सेगमेंट में कम्बाइंड एवरेज डेली टर्नओवर में पिछले वर्ष की तुलना में 20.4 फीसदी की गिरावट के साथ 57700 करोड़ रुपये पर रही है।

अदाणी मामले ने निवेशकों का मूड किया खराब

घरेलू बाजार में अदाणी मामले ने निवेशकों का मूड खराब कर दिया है। तमाम फंड मैनेजरों का कहना है कि अदाणी धमाके की धूल अभी भी पूरी तरह से बैठी नहीं है। आम धारणा ये है कि अगर भारतीय रिज़र्व बैंक 6 अप्रैल की बैठक में ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की अंतिम बढ़ोतरी करते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी को रोकने के संकेत देता है, तो इक्विटी बाजारों के एक राहत मिल सकती है।

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