शेयरों में निवेश करने वाले लोग जिन दो शब्दों से ज्यादा डरते हैं वह'मार्केट क्रैश'है। अचानक शेयरों की कीमतों में तेज गिरावट और इसके बाद बिजनेस चैनलों पर चलने वाली खबरें बड़े-बड़े निवेशकों को चिंता में डाल देती हैं। लेकिन, सच यह है कि आपको मार्केट क्रैश से घबराने की जरूरत नहीं है। इतिहास बताता है कि मार्केट क्रैश से ठीक पहले शेयर खरीदने वाले निवेशकों ने लंबी अवधि में शानदार रिटर्न कमाए हैं। ऐसे निवेशकों को उनके धैर्य का बड़ा इनाम मिला है।
2000 से 2020 तक कई बार क्रैश किया मार्केट
साल 2000 में डॉटकॉम बबल से लेकर 2020 में कोविड तक मार्केट कई बार क्रैश (Market Crash) किया है। Nifty 50 कई बार फिसला है। कई बार तो इसमें 50 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। सबसे तेज गिरावट 2008 में ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के वक्त आई थी, जब निफ्टी करीब 59.5 फीसदी क्रैश कर गया था। शॉर्ट टर्म में यह गिरावट निराश करती है। लेकिन, पिछले 25 सालों के इतिहास को देखने से साफ हो जाता है कि क्रैश करने के बाद मार्केट ने हर बार ऊंचाई का नया रिकॉर्ड बनाया है।
क्रैश के बाद बावजूद मार्केट का रिटर्न शानदार
इंडिया में मार्केट के अच्छे प्रदर्शन में इकोनॉमी की तेज ग्रोथ और कंपनियों की अच्छी अर्निंग्स ग्रोथ का हाथ रहा है। मुश्किल समय में भी शेयरों का सालाना रिटर्न 9-15 फीसदी रहा है। यह 7-8 फीसदी के फिक्स्ड इनकम रिटर्न और 4-6 फीसदी के इनफ्लेशन रेट से ज्यादा है। यह जानकारी फंड्सइंडिया की नई रिपोर्ट पर आधारित है। साल 2000 में डॉटकॉम बबल के दौरान मार्केट 50.2 फीसदी गिरा था। इसके बावजूद बीते दो दशकों से ज्यादा पीरियड में मार्केट का सालाना रिटर्न 12 फीसदी रहा है।
कोविड के वक्त मार्केट 38 फीसदी गिरा था
दो-ढाई दशक में सालाना 12 फीसदी रिटर्न का मतलब है कि आपका 1 रुपया बढ़कर 20 रुपये हो गया। साल 2004 में लोकसभा चुनावों के नतीजें अनुमान से उलट आए थे। तब मार्केट 29.8 फीसदी गिर गया था। इसके बावजूद मार्केट ने सालाना 14 फीसदी का रिटर्न दिया है। इसका मतलब है कि तब किया गया 1 रुपये का निवेश आज 16.5 रुपये हो गया है। 2008 के गलोबल फाइनेंशियल क्राइसिस में तो मार्केट 59.5 फीसदी गिरा था। 2020 में कोविड के समय मार्केट 38.3 फीसदी गिरा था।
धैर्य बनाए रखने पर लंबी अवधि में होती है अच्छी कमाई
2008 के बाद से मार्केट का सालाना रिटर्न 9 फीसदी है। 2020 में कोविड की गिरावट के बाद से मार्केट का सालाना रिटर्न 15 फीसदी रहा है। निवेशकों का पैसा कुछ ही सालों में दोगुना हुआ है। रिटर्न का यह कैलकुलेशन 31 जुलाई, 2025 तक के हर पीक से किया गया है। इतिहास बताया है कि अगर किसी ने मार्केट में गिरावट से ठीक पहले इनवेस्ट किया है तो भी निवेश बनाए रखने पर डेट इंस्ट्रूमेंट्स और इनफ्लेशन से ज्यादा रिटर्न मिला है। क्रैश से पहले निवेश किया है तो धैर्य बनाए रखना होगा। हालांकि, क्रैश के बाद निवेश करने पर रिटर्न बढ़ जाता है।