स्टॉक मार्केट में आने वाले दिनों में बढ़ सकती है FIIs की बिकवाली, जानिए क्यों

ऑयल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से इंडिया सहित इमर्जिंग मार्केट्स में बिकवाली देखने को मिल सकती है। पिछले हफ्ते मार्केट में तेजी के बावजूद FIIs ने 565 करोड़ रुपये निकाले। इस डेटा में बल्क डील्स और प्राइमरी के जरिए होने वाला निवेश शामिल हैं। बीते हफ्ते Sensex और Nifty करीब 2 फीसदी तेजी आई। हालांकि, मार्केट के दूसरे सूचकांकों में नरमी देखने को मिली

अपडेटेड Sep 18, 2023 पर 12:22 PM
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NSDL के डेटा के मुताबिक, FIIs ने इस महीने शुद्ध रूप से 4,768 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। एनालिस्ट्स का कहना है कि यह ट्रेंड इस हफ्ते भी जारी रह सकता है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की हालिया बिकवाली का मार्केट पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। इसकी वजह घरेलू संस्थागत निवेशकों की अच्छी खरीदारी है। सितंबर में अब तक FIIs का रुख इंडियन स्टॉक मार्केट को लेकर बेयरिश रहा है। NSDL के डेटा के मुताबिक, उन्होंने शुद्ध रूप से 4,768 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। एनालिस्ट्स का कहना है कि यह ट्रेंड इस हफ्ते भी जारी रह सकता है। कोटक सिक्योरिटीज के श्रीकांत चौहान (हेड ऑफ रिसर्च-रिटेल) ने कहा कि इस हफ्ते अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट के बारे में फैसला लेगा। इससे पहले FIIs की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव दिख सकता है।

पिछले हफ्ते 565 करोड़ रुपये की बिकवाली

चौहान ने कहा कि ऑयल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से इंडिया सहित इमर्जिंग मार्केट्स में बिकवाली देखने को मिल सकती है। पिछले हफ्ते मार्केट में तेजी के बावजूद FIIs ने 565 करोड़ रुपये निकाले। इस डेटा में बल्क डील्स और प्राइमरी के जरिए होने वाला निवेश शामिल हैं। बीते हफ्ते Sensex और Nifty करीब 2 फीसदी तेजी आई। हालांकि, मार्केट के दूसरे सूचकांकों में नरमी देखने को मिली। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें मार्केट के लिए चिंता का कारण है। इससे इनफ्लेशन बढ़ने का खतरा है। साथ ही इससे RBI इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के बारे में सोच सकता है। ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है।


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क्रूड ऑयल में उछाल बढ़ा सकता है मुश्किल

क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें इंडस्ट्री के लिए भी अच्छा नहीं है। कई सेक्टर में क्रूड ऑयल से हासिल होने वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बतौर कच्चे माल होता है। इनमें पेंट, फार्मा, प्लास्टिक और पैकेजिंग इंडस्ट्री शामिल हैं। इनपुट कॉस्ट बढ़ने से इन कंपनियों के मार्जिन में कमी आ सकती है। इसका असर कंपनियों के आउटलुक और दूसरी तिमाही के नतीजों पर पड़ेगा। निवेशकों को दूसरी चिंता वैल्यूएशंस को लेकर है। कई सेक्टर में स्टॉक्स की कीमतों बहुत बढ़ गई हैं। इससे पीई बढ़ा है। कई कंजरवेटिव इनवेस्टर्स हाई पीई पर नया निवेश नहीं करना चाहते।

शेयरों की वैल्यूएशंस बहुत ज्यादा हुई

ब्रोकरेज फर्म Geojit Financial Services के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ी है और डॉलर इंडेक्स 105 के ऊपर पहुंच गया है। ऐसे में विदेशी संस्थागत निवेशकों और बिकवाली कर सकते हैं। मार्केट में रिटेल इनवेस्टर्स ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसकी वजह तेजी है। इससे निफ्टी की वैल्यूएशंस बहुत बढ़ गई है। मिड और स्मॉल कैप स्टॉक्स की वैल्यूएशंस बहुत ज्यादा बढ़ गई है।

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