इंडियन स्टॉक मार्केट्स में 12 मई को आई 3 फीसदी की तेजी से निवेशकों को काफी राहत मिली। हालांकि, 13 मई को शुरुआती कारोबार में मार्केट्स पर दबाव दिखा। अभी एसी खबरें ज्यादा हैं जो मार्केट और इकोनॉमी के लिए पॉजिटिव हैं। पाकिस्तान के साथ सीजफायर हो गया। अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर डील हो गई है। इंडिया और ब्रिटेन में फ्री ट्रेड एंग्रीमेंट हो गया है। रूस ने यूक्रेन के साथ समझौते के संकेत दिए हैं। मनीकंट्रोल ने मार्केट की तस्वीर को समझने के लिए लॉयन हिल कैपिटल के फाउंडर एस कृष्णकुमार से बातचीत की।
इंडिया वैश्विक परिदृश्य पर लीडर के रूप में उभरेगा
क्या पाकिस्तान के साथ टकराव (Conflict with Pakistan) खत्म हो गया है? इस सवाल के जवाब में कृष्णकुमार ने कहा कि इस बारे में अनुमान लगाना मुश्किल है। इतिहास को देखने से यह साफ हो जाता है तो पाकिस्तान के साथ समय-समय पर टकराव होता रहता है। हालांकि, उम्मीद है कि इंडिया नए वैश्विक परिदृश्य में लीडर के रूप में उभरेगा। सरकार की वित्तीय स्थिति पर थोड़ा असर पड़ सकता है। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का फोकस अपनी वित्तीय स्थिति को ठीक करने पर है। थोड़े समय से लिए वॉर सेस (War Cess) से इनकार नहीं किया जा सकता। सरकार ऐसे उपाय कर सकती है, जिससे प्राइवेट सेक्टर निवेश बढ़ाने के लिए उत्साहित होगा।
रेवेन्यू और अर्निंग्स ग्रोथ पर निर्भर करेगी बाजार की चाल
बाजार की चाल आगे कैसी रह सकती है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि मार्केट्स के लिए रेवेन्यू और अर्निंग्स ग्रोथ सबसे अहम हैं। खासकर तब जब स्ट्रॉन्ग रिकवरी के बाद निफ्टी अपने पिछले हाई से सिर्फ 6 फीसदी नीचे रह गया है। अगले छह महीनों में मार्केट का प्रदर्शन अर्निंग्स अपग्रेड पर निर्भर करेगा। अभी ग्रोथ डायनेमिक्स और कॉन्फिडेंस कमजोर है। लेकिन, एक्सपोर्ट्स को लेकर तस्वीर साफ होते ही माहौल बदलेगा। ऐसे में थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। शॉर्ट टर्म में इंतजार करो और देखो की पॉलिसी ठीक रहेगी।
चीन में ज्यादा निवेश देखने को मिल सकता है
अमेरिका चीन में व्यापार समझौते का इंडिया पर क्या असर पड़ेगा? कृष्णकुमार ने कहा कि यह चीन के लिए पक्के तौर पर फायदेमंद है। भले ही थोड़े समय के लिए लेकिन जिस तरह से टैरिफ बढ़ाने के फैसले को वापस लिया गया है, उससे संकेत मिलता है कि दोनों देश आपसी मतभेद बातचीत के जरिए हल करने को तैयार हैं। चीन की वैल्यूएशन इंडिया के मुकाबले कम है। दूसरा यह कि बीते काफी समय से चीन के बाजार का प्रदर्शन खराब रहा है। ऐसे में चीन में ज्यादा निवेश देखने को मिल सकता है। इससे इंडिया में निवेश पर असर पड़ सकता है।
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शॉर्ट टर्म में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं
उन्होंने कहा कि इंडियन मार्केट्स में आई हालिया तेजी के बाद वैल्यूएशन फिर से बढ़ गई है। इस वजह से शॉर्ट टर्म में मार्केट में ज्यादा तेजी की संभावना नहीं है। हालांकि, अगर विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बढ़ती है तो तस्वीर बदल सकती है।