पहली तिमाही में मांग कमजोर रहने से भारतीय टायर इंडस्ट्री की चिंताएं बढ़ गई हैं। इस दौरान मांग में गिरावट की वजह से टायरों की सेल्स ग्रोथ पर असर पड़ा है। पिछले साल टायर इंडस्ट्री की परफॉर्मेंस अच्छी रही थी, लेकिन इस साल पहली तिमाही में इस इंडस्ट्री में सुस्ती बनी रही। हालांकि, इस मुश्किल दौर में पैसेंजर कार टायरों, खास तौर पर ओरिजिनल इक्विपमेंट (OE) सेल्स के मोर्चे पर बेहतर नतीजे की उम्मीद है। टायरों के एक्सपोर्ट को भी नुकसान पहुंचा है।
