सुप्रीम कोर्ट ने ₹8400 करोड़ के बॉन्ड्स राइट-ऑफ करने के Yes Bank के फैसले को खारिज किया, शेयर क्रैश, जानिए क्या है यह मामला

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने यस बैंक के एटी-1 बॉन्ड्स को राइट-ऑफ करने के फैसले को खारिज किया था। इसके खिलाफ यस बैंक ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी

अपडेटेड Oct 15, 2026 पर 3:56 PM
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यस बैंक का शेयर 15 फीसदी क्रैश कर गया।

यस बैंक के शेयरों में 15 अक्तूबर को दोपहर बाद अचानक तेज गिरावट आई। शेयर 15 फीसदी लुढ़क गया। इसकी वजह सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने 8,400 करोड़ रुपये के एडिशनल टियर-1 (एटी-1) बॉन्ड्स राइट-ऑफ करने के यस बैंक के फैसले को गलत माना है। यस बैंक ने 2020 में इन बॉन्ड्स को राइट-ऑफ किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने यस बैंक के एटी-1 बॉन्ड्स को राइट-ऑफ करने के फैसले को खारिज किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यस बैंक को 9.5 और 9 फीसदी के तय कूपन रेट से एटी-1 बॉन्ड्स के 8,400 करोड़ रुपये वापस करने होंगे।


एटी-1 बॉन्ड्स की वैल्यू यस बैंक के प्रॉफिट से ज्यादा

देश की सबसे बड़ी अदालत ने यह भी कहा है कि यस बैंक के एडमिनिस्ट्रेटर को 8,400 करोड़ रुपये के एटी-1 बॉन्ड्स को राइट-ऑफ नहीं करना चाहिए था। ऐसा करना मास्टर सर्कुलर के मुताबिक नहीं था। एटी-1 बॉन्ड्स की वैल्यू काफी ज्यादा है। यह FY26 में यस बैंक के नेट प्रॉफिट से ज्यादा है। यस बैंक का नेट प्रॉफिट FY26 में 3,476 करोड़ रुपये था।

2020 में एडमिनिस्ट्रेटर ने राइट-ऑफ करने का फैसला किया था

यस बैंक को 2020 में डूबने से बचाने के लिए एडमिनिस्ट्रेटर ने एटी-1 बॉन्ड्स को राइट-ऑफ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। उसने कहा था कि यस बैंक को डूबने से बचाने के लिए ऐसा करना जरूरी है। Yes Bank ने 2016 और 2017 में एटी-1 बॉन्ड्स के जरिए 8,415 करोड़ रुपये जुटाए थे। एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज की अगुवाई में बॉन्ड के इनवेस्टर्स ने राइट-ऑफ के फैसले को चैलेंज किया था।

बॉन्ड्स के इनवेस्टर्स ने राइट-ऑफ के फैसले को चैलेंज किया था

बॉन्ड्स के इनवेस्टर्स की दलील थी कि यस बैंक के एडमिनिस्ट्रेटर के पास एटी-1 बॉन्ड्स राइट-ऑफ करने का कानूनी अधिकार नहीं था। उनका दावा था कि इस तरह के राइट-ऑफ का कानूनी अधिकार सिर्फ आरबीआई को है। बेसल-III सके तहत एटी-1 बॉन्ड्स का इस्तेमाल हाइब्रिड कैपिटल इंस्ट्रूमेंट्स के रूप में होता है।

राइट-ऑफ का मतलब है कि इनवेस्टर्स के पूरे पैसे डूब जाएंगे

एटी-1 बॉन्ड्स को राइट-ऑफ करने का मतलब है कि इसके निवेशकों के पूरे पैसे डूब जाएंगे। बताया जाता है कि एटी-1 बॉन्ड्स के 97 फीसदी से ज्यादा इनवेस्टर्स यस बैंक के इंडिविजुअल कस्टमर्स हैं। 2021-2022 में SEBI ने इन बॉन्ड्स को बैंक के ग्राहकों को गलत तरीके से बेचने के लिए बैंक के पूर्व एमडी और सीईओ राणा कपूर पर जुर्मान लगाया था।

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सेबी ने गलत तरीके से बॉन्ड्स बेचने पर लगाया था जुर्माना 

सेबी ने कहा था कि यस बैंक ने इस बॉ़न्ड्स को बेचने से पहले इससे जुड़े रिस्क के बारे में अपने ग्राहकों को नहीं बताया था। यहां तक कि ये बॉन्ड्स सीनियर सिटीजंस तक को बेचे गए थे। जनवरी 2023 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बॉन्ड्स राइट-ऑफ करने के फैसले को खारिज कर दिया था। इसके बाद यस बैंक ने मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस माले में अपना फैसला सुनाया है।

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