सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, इंडस्ट्रियल अल्कोहल पर सिर्फ राज्यों का अधिकार

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि इंडस्ट्रियल अल्कोहल आम आदमी की खपत के लिए नहीं है। इसलिए इसपर केंद्र सरकार का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने 8:1 बहुमत से फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 25 साल पुराने अपने ही फैसले को पलट दिया है

अपडेटेड Oct 23, 2024 पर 3:18 PM
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इंडस्ट्रियल अल्कोहल का केमिकल,एथेनॉल और पट्रोलियम प्रोडक्ट में इस्तेमाल होता है

इंडस्ट्रियल अल्कोहल पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। इंडस्ट्रियल अल्कोहल पर सिर्फ राज्यों का अधिकार है। केंद्र सरकार के पास इस रेगुलेट करने की कोई पावर नहीं है। इस खबर पर और ज्यादा जानकारी देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के असीम मनचंदा ने कहा कि इंडस्ट्रियल अल्कोहल पर सुप्रीम कोर्ट के आज आए अहम फैसले में कहा गया है कि इंडस्ट्रियल अल्कोहल पर राज्यों का अधिकार है। केंद्र सरकार के पास इसे रेगुलेट करने की पावर नहीं है। इंडस्ट्रियल अल्कोहल का केमिकल, एथेनॉल और पट्रोलियम प्रोडक्ट में इस्तेमाल होगा।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि इंडस्ट्रियल अल्कोहल आम आदमी की खपत के लिए नहीं है। इसलिए इसपर केंद्र सरकार का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने 8:1 बहुमत से फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 25 साल पुराने अपने ही फैसले को पलट दिया है। इससे पहले 7 जजों की पीठ ने केंद्र के पक्ष में फैसला दिया था।

सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने 1990 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटते हुए 8 जजों ने बहुमत के फैसले में कहा कि इंडस्ट्रियल अल्कोहल का उत्पादन भले ही नशे के लिए नहीं किया जाता लेकिन ऐसे सभी पदार्थ नशीले पदार्थ की श्रेणी में आते हैं। राज्य सरकारें इसे रेग्यूलेट कर सकती हैं और टैक्स लगा सकती हैं। जस्टिस बी वी नागरत्न ने बहुमत की राय से अलग फैसला देते हुए कहा कि केंद्र (संसद) ही इसको रेग्यूलेट कर सकती है।


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बता दें कि 1990 में 7 जजों की संविधान पीठ ने सिंथेटिक्स एंड केमिकल्स लिमिटेड बनाम उत्तर प्रदेश में कहा था कि "मादक शराब" का मतलब केवल शराब के तौर पर इस्तेमाल होने वाले अल्कोहल से है, और औद्योगिक अल्कोहल (रेक्टिफाइड या डिनेचर्ड स्पिरिट) को रेगुलेट करना राज्य सरकार की शक्तियों के दायरे से बाहर है।

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