Suzlon Shares: विंड टर्बाइन बनाने वाली कंपनी सुजलॉन के शेयर नतीजे आने के बाद से लगातार दूसरे दिन अपर सर्किट पर पहुंच गए। आज इसके शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए और यह 60 रुपये के लेवल पर चला गया। इसके शेयर ऐसे समय में अपर सर्किट पर गए हैं जब लगातार दो दिन बजट के चलते मार्केट में बिकवाली का भारी दबाव है। अब आज इसके शेयर जिस लेवल पर पहुंचे हैं, वह इसका हाईएस्ट टारगेट प्राइस था। फिलहाल BSE पर यह 5 फीसदी की बढ़त के साथ 60.71 रुपये पर बना हुआ है। इस महीने यह करीब 15 फीसदी और इस साल 59 फीसदी मजबूत हुआ है।
Suzlon के शेयरों की हुई कई ब्लॉक डील
सुजलॉन के शेयरों की आज कई ब्लॉक डील हुई। इन ब्लॉक डील्स के जरिए कंपनी की 0.3 फीसदी होल्डिंग का 227 करोड़ रुपये में लेन-देन हुआ। सौदे के तहत 60 रुपये के औसत भाव पर 3.8 करोड़ शेयरों का लेन-देन हुआ। हालांकि इन शेयरों को किसने खरीदा और किसने बेचा, इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है।
जून तिमाही में कम हुई खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी
सुजलॉन के लिए चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही शानदार रही। इसका नेट प्रॉफिट 200 फीसदी उछलकर 302 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। रेवेन्यू भी सालाना आधार पर 50 फीसदी उछलकर 2016 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कंपनी की डिलीवरी भी सात साल के हाई पर पहुंच गई। जून तिमाही में कंपनी का ऑर्डर बुक 3.8 गीगावॉट का रहा जो रिकॉर्ड लेवल पर है और सुजलॉन ग्रुप के सीएफओ हिमांशु मोदी के मुताबिक इसे 18-24 महीने में डिलीवर कर देना है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024 बैलैंस शीट के कंसालिडेशन का था और अब मौजूदा वित्त वर्ष 2024-25 मुनाफे पर फोकस का है। जून तिमाही में सुजलॉन का मार्जिन करीब 4 फीसदी उछलकर 17.5 फीसदी पर पहुंच गया और हिमांशु का मानना है कि कंपनी इसे 17-18 फीसदी के बीच बनाए रखने में कामयाब रहेगी।
हालांकि शेयरहोल्डिंग की बात करें तो जून तिमाही में बड़ा बदलाव हुआ है और छोटे निवेशकों यानी 2 लाख रुपये के कम का निवेश करने वाले निवेशकों की हिस्सेदारी घटी है। सुजलॉन में अब 41.43 लाख छोटे शेयरहोल्डर्स हैं। मार्च तिमाही में इसमें 43 लाख शेयरहोल्डर्स थे जो करीब 26 फीसदी होल्डिंग के बराबर थी। 2 लाख रुपये से अधिक के निवेश वाले हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स की हिस्सेदारी भी इस दौरान घटकर 15.79 फीसदी से 14.76 फीसदी पर आ गई। वहीं विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 19.57 फीसदी से बढ़कर 21.53 फीसदी पर पहुंच गई। घरेलू संस्थागत निवेशकों की भी हिस्सेदारी 1.86 फीसदी से बढ़कर 3.82 फीसदी पर पहुंच गई।