टाटा समूह की कंपनी टाटा केमिकल्स का शेयर 15 सितंबर को बाजार खुलते ही रॉकेट बन गया। 20 फीसदी उछाल के बाद शेयर में अपर सर्किट लग गया। इसकी वजह यह है कि आरबीआई ने एनबीएफसी के अपने लाइसेंस को सरेंडर करने का टाटा संस का अप्लिकेशन खारिज कर दिया है। इसका मतलब यह है कि टाटा संस को अब खुद को शेयर बाजारों में लिस्ट कराना होगा। टाटा संस टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है।
टाटा संस खुद को शेयर बाजारों में लिस्ट नहीं कराना चाहती
Tata Sons का दर्जा अभी अपर-लेयर एनबीएफसी का है। अपर-लेयर एनबीएफसी पर जो नियम लागू होते हैं, उसके मुताबिक टाटा संस को खुद को शेयर बाजारों में लिस्ट कराना जरूरी है। टाटा संस खुद को शेयर बाजारों पर लिस्ट नहीं कराना चाहती है। इसके लिए उसने एनबीएफसी का अपना लाइसेंस सरेंडर करने के लिए आरबीआई को अप्लिकेशन भेजा था। बीते आरबीआई ने टाटा संस के अप्लिकेशन को खारिज कर दिया।
टाटा संस अपर-लेयर एनबीएफसी की कैटेगरी में आती है
आरबीआई के नियम के मुताबिक, ऐसी एनबीएफसी जिनकी एसेट्स 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है, वे अपर-लेयर एनबीएफसी की कैटेगरी में आती हैं। उन्हें खुद को स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट कराना अनिवार्य है। मार्च 2025 के आखिर में टाटा संस का एसेट्स 1.75 लाख करोड़ रुपये था। इस वजह से वह अपर-लेयर एनबीएफसी की कैटेगरी में आती है।
टाटा इनवेस्टमेंट सहित टाटा समूह के दूसरे शेयरों में भी तेजी
15 सितंबर को Tata Chemicals के अलावा टाटा संस की दूसरी कंपनियों के शेयरों में भी तेजी दिखी। Tata Investment Corporation के शेयर में 13 फीसदी से ज्यादा की तेजी दिखी। इससे टाटा केमिकल्स और टाटा इनवेस्टमेंट दोनों मंगलवार निफ्टी 500 के सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर बन गए। टाटा मोटर्स पीवी के शेयरों नें भी 4.5 फीसदी तेजी दिखी।
अप्लिकेशन खारिज होने के बाद टाटा संस को खुद को लिस्ट कराना होगा
RBI ने पहली बार सितंबर 2022 में टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की लिस्ट में शामिल किया था। अपर-लेयर एनबीएफसी को खुद को तीन साल के अंदर शेयर बाजारों में लिस्ट कराना जरूरी है। इस हिसाब से टाटा संस को खुद को 30 सितंबर, 2025 तक शेयर बाजारों में लिस्ट करना जरूरी थी। लेकिन टाटा संस ने 2024 में एनबीएफसी का अपना लाइसेंस सरेंडर करने के लिए आरबीआई के पास अप्लाई किया। आरबीआई ने बीते हफ्ते इस अप्लिकेशन को खारिज किया।