TCS Q2 Preview: देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर कंपनी TCS 8 अक्टूबर को जुलाई-सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेगी। इसके साथ ही IT सेक्टर के Q2 रिजल्ट सीजन की शुरुआत हो जाएगी।

TCS Q2 Preview: देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर कंपनी TCS 8 अक्टूबर को जुलाई-सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेगी। इसके साथ ही IT सेक्टर के Q2 रिजल्ट सीजन की शुरुआत हो जाएगी।
इस तिमाही में TCS को 1.45 अरब डॉलर की बड़ी डील मिली है। कंपनी ने पोर्शे की IT इकाई MHP को भी खरीदा है। इसके अलावा हैदराबाद में 70,000 करोड़ रुपये के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट का ऐलान किया है।
दूसरी तरफ, पैरेंट कंपनी टाटा संस में नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही है। ऐसे में TCS के नतीजों के साथ मैनेजमेंट की कमेंट्री भी काफी अहम होगी।
ब्रोकरेज को इस तिमाही में TCS की ग्रोथ बहुत तेज रहने की उम्मीद नहीं है। तिमाही आम तौर पर IT कंपनियों के लिए अच्छी रहती है। लेकिन AI की वजह से कीमतों और लागत पर दबाव बढ़ रहा है। इसका असर ग्रोथ पर पड़ सकता है। नतीजों के बाद इन पांच मुद्दों पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी।
1. ग्रोथ धीमी, मार्जिन में ज्यादा बदलाव नहीं
CNBC-TV18 के पोल के मुताबिक, दूसरी तिमाही में TCS का रेवेन्यू तिमाही आधार पर 1.3% बढ़कर 73,225 करोड़ रुपये हो सकता है। कंपनी का मुनाफा 2.4% बढ़कर 13,673 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
EBIT मार्जिन करीब 20 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 24.2% रह सकता है। पिछली तिमाही में कंपनी ने सालाना वेतन बढ़ोतरी का असर झेला था। इसलिए इस बार मार्जिन को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक, सालाना आधार पर मार्जिन में करीब 100 बेसिस प्वाइंट की कमी आ सकती है। हालांकि, तिमाही आधार पर इसमें ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है।
वेतन बढ़ोतरी के अलावा अधिग्रहण और प्राइसिंग का दबाव मार्जिन पर असर डाल सकता है। ऐसे में मैनेजमेंट इस पर क्या कहता है, बाजार की नजर रहेगी।
2. बड़ी डील का सिलसिला जारी रहेगा?
TCS ने इस तिमाही में कई बड़ी डील हासिल की हैं। HDFC सिक्योरिटीज और कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने दूसरी तिमाही में कंपनी की कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू यानी TCV करीब 8-11 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया है।
सबसे बड़ी डील 1.45 अरब डॉलर की है। यह जर्मन लग्जरी कार कंपनी पोर्शे के साथ हुई है। इसके अलावा ABB, JFK एयरपोर्ट, JLR, Aareal Bank, Dubai Gold & Commodity Exchange और Vodafone के साथ भी TCS ने डील की है।
अब बाजार यह देखेगा कि कंपनियों का खर्च कब बढ़ना शुरू होता है। खासकर डिस्क्रिशनरी यानी कम जरूरी खर्च में रिकवरी कब आती है। फैसले लेने में हो रही देरी और दूसरी छमाही की डिमांड पर भी मैनेजमेंट का रुख अहम होगा।
3. M&A से कितनी ग्रोथ मिलेगी?
TCS लगातार दूसरी कंपनियों को खरीदकर अपना कारोबार बढ़ा रही है। इस तिमाही में भी दो बड़े अधिग्रहण हुए हैं। TCS ने पोर्शे की IT इकाई MHP को करीब 373 मिलियन डॉलर में खरीदा है। इससे कंपनी को ऑटोमोटिव कंसल्टिंग और टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग में नई क्षमताएं मिलेंगी।
कंपनी ने बेंगलुरु में Best Buy की GCC यूनिट भी खरीदी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, TCS को Best Buy से 5 साल का करीब 2,000 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है। अब निवेशक जानना चाहेंगे कि इन अधिग्रहणों से ग्रोथ कितनी बढ़ेगी। साथ ही इनका मार्जिन पर कितना असर पड़ेगा।
4. AI से कितनी कमाई बढ़ेगी?
TCS अपने कारोबार में बड़ा AI बदलाव कर रही है। कंपनी AI से जुड़ी टेक्नोलॉजी सर्विसेज पर ज्यादा जोर दे रही है। इसके लिए कारोबार की प्राथमिकताएं भी बदली जा रही हैं। इसी रणनीति के तहत TCS ने हैदराबाद में 1GW डेटा सेंटर लगाने के लिए 70,000 करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया है।
जून में कंपनी ने बताया था कि उसकी सालाना AI रेवेन्यू करीब 2.6 अरब डॉलर पहुंच गई है। इसमें तिमाही आधार पर 13.6% की ग्रोथ हुई थी। अब सवाल यह है कि इतने बड़े निवेश से TCS कमाई कैसे बढ़ाएगी। AI कारोबार आगे कितनी तेजी से बढ़ेगा, इस पर मैनेजमेंट की टिप्पणी अहम होगी।
5. दूसरी छमाही में कितनी हायरिंग होगी?
पहली तिमाही तक TCS करीब 25,000 फ्रेशर्स को ऑफर दे चुकी थी। पहले कंपनी ने संकेत दिया था कि FY27 में भी FY26 की तरह 40,000 से ज्यादा फ्रेशर्स की भर्ती हो सकती है। हालांकि, बाद में कंपनी ने कहा कि FY27 की हायरिंग आने वाली तिमाहियों की डिमांड पर निर्भर करेगी।
TCS करीब 8,900 फॉरवर्ड-डिप्लॉय्ड इंजीनियर्स यानी FDEs भी जोड़ने की योजना बना रही है। इनकी मदद से AI पर फोकस करने वाली सेल्स और कंसल्टिंग को मजबूत किया जाएगा।
अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि दूसरी छमाही में कंपनी कितनी भर्ती करती है। साथ ही AI की वजह से नौकरियों और कर्मचारियों की जरूरत में क्या बदलाव आता है, यह भी अहम रहेगा।
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