सितंबर में डीमैट खातों (Demat Accounts) की संख्या बढ़कर 12.97 करोड़ हो गई। यह सालाना आधार पर 26 प्रतिशत की वृद्धि है। इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से इक्विटी से आकर्षक रिटर्न मिलना रहा। NSDL और CDSL के आंकड़ों के मुताबिक, माह के दौरान 30.6 लाख से ज्यादा डीमैट खाते खोले गए। अगस्त में यह आंकड़ा 31 लाख था। यह लगातार दूसरा महीना है जब नए खुले डीमैट खातों की संख्या 30 लाख से ज्यादा रही। सितंबर में डीमैट खातों के एडिशंस के पीछे एक वजह यह भी है कि जुलाई के बाद से कई आईपीओ अच्छे प्रीमियम पर लिस्ट हुए हैं। इससे कई निवेशक बाजार की ओर आकर्षित हुए होंगे। एनालिस्ट्स का कहना है कि डिस्काउंट ब्रोकरों सहित ब्रोकरेज की ओर से रेगुलर अकाउंट एक्वीजीशन कैंपेन्स भी डीमैट खातों में वृद्धि की एक वजह हो सकते हैं।
मेनबोर्ड सेगमेंट में, सितंबर माह में 14 कंपनियों के IPO आए। यह आंकड़ा सितंबर 2010 के बाद सबसे अधिक है। इन 14 IPO से लगभग 11,868 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। इस साल अब तक कुल मिलाकर 34 कंपनियों ने IPO के जरिए करीब 26,913 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस साल सितंबर माह में 10 से ज्यादा मेनबोर्ड कंपनियों ने शेयर बाजार में एंट्री की।
सितंबर में बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में 1.54 प्रतिशत और 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। विदेशी निवेशकों ने महीने के दौरान भारतीय शेयर बाजारों से 14767 करोड़ रुपये निकाले।
सितंबर महीने के दौरान, स्मॉल एंड मिड साइज्ड एंटरप्राइजेस (SME) के IPOs में रिकॉर्ड तोड़ उछाल आया। प्राइम डेटाबेस के डेटा के अनुसार, सितंबर में 37 कंपनियों के SME IPO आए और इन्होंने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए। साल 2012 में SME IPO शुरू होने के बाद से यह एक माह में आए SME IPO का सबसे उच्च स्तर है। मौजूदा वर्ष में अब तक 136 कंपनियों ने SME आईपीओ लॉन्च किए हैं, जिससे लगभग 3,457 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं।
युवा निवेशक हो रहे आकर्षित
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के अनुसार, कोविड के बाद से डीमैट खातों में वृद्धि एक स्थायी ट्रेंड को दर्शाती है, जो युवाओं की इक्विटी को प्राथमिकता दिए जाने से प्रेरित है। अस्थिरता के बावजूद, कोविड के बाद आकर्षक इक्विटी रिटर्न, युवा निवेशकों को आकर्षित करना जारी रखे हुए है, जो बाजार में गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में देखते हैं। हालांकि, यदि किसी बड़ी घटना के कारण कई नए निवेशकों को भारी नुकसान होता है तो स्थिति नकारात्मक हो सकती है।