Validus Wealth के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर राजेश चेरुवू (Rajesh Cheruvu) ने बाजार की आगे की दशा-दिशा, एलआईसी के आईपीओ और दूसरे अहम मुद्दों पर मनीकंट्रोल से व्यापक बातचीत की। उन्होंने कहा कि मार्च में दलाल स्ट्रीट में आने वाले एलआईसी के आईपीओ का वैल्यूएशन 10 से 21.5 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। जिसके चलते यह अपने आकार और मात्रा के आधार पर भारतीय एक्सचेंजो पर लिस्टेड टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएड बिजनेस में हो सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि हालांकि सेंसेक्स-निफ्टी पर एलआईसी का वेटेज कम हो सकता है क्योंकि यह स्टॉक के फ्री फ्लोट के साथ लिंक होगा। बता दें कि किसी कंपनी के फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन का कैल्कुलेशन मार्केट में तुरंत ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध शेयरों के आधार पर होता है।
इस बातचीत में राजेश चेरुवू ने आगे कहा कि अमेरिकी ऑयल प्रोडक्शन में गिरावट और जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच ग्लोबल इकोनॉमी में पिछले 7 महीने से आ रही रिकवरी के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। हमारा मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में वर्तमान में आया उछाल अस्थाई नहीं है। अब हमें यह स्वीकार करना पड़ेगा कि शॉर्ट टर्म से मीडियम टर्म में कच्चे तेल की कीमतों का 75 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना न्यू नॉर्मल है।
बाजार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 2 साल में बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली है। अब बाजार में बॉन्ड खरीद प्रोग्राम में कटौती और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद के साथ 2022 में दुनियाभर के बाजारों में करेक्शन देखने को मिल सकता है। या दूसरे शब्दों में कहें तो बाजार अब थोड़ा सुस्ताता नजर आ सकता है। हालांकि भारतीय बाजार तुलनात्मक रूप से बेहतर इकोनॉमिक ग्रोथ और कंज्यूमर इन्फ्लेशन के आरबीआई के रेंज में रहने के साथ दुनिया के दूसरे बाजारों से बेहतर प्रदर्शन करते नजर आ सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय बाजार का मीडियम से लॉन्ग टर्म आउटलुक काफी अच्छा नजर आ रहा है। ऐसे में शॉर्ट टर्म में आनेवाली कोई गिरावट निवेशकों को बाजार में एंट्री का अच्छा मौका देगी।
यूएस फेड की मौद्रिक नीतियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 22 मार्च को होने वाली फेड मीटिंग में हमें ब्याज दरों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। अब चर्चा इस बात पर नहीं हो रही है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी होगी कि नहीं होगी बल्कि इस पर हो रही है कि ब्याज दरों में कितनी बढ़ोतरी होगी। बता दें कि पहले अंदाजा लगाया जा रहा था कि साल 2022 में 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है लेकिन अब जानकारों का अंदाजा है कि यूएस फेड साल 2022 में 1.50 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके अलावा साल 2022 की दूसरी छमाही से बॉन्ड खरीद प्रोग्राम में भी कटौती देखने को मिल सकती है। जिनकी वजह से लिक्विडिटी की उपलब्धता और लागत पर निगेटिव असर पड़ सकता है।
बाजार की किन सेक्टरों और थीम्स पर निवेश के नजरिए से है आपकी नजर? इस सवाल का जवाब देते हुए राजेश चेरुवू ने कहा कि मुझे वह सेगमेंट पसंद है जिनको सरकार के चालू खर्च योजनाओं से फायदा होगा। इसके अलावा वो सेक्टर भी हमारे रडार पर है जिनको डिजिटिलाइजेशन और ऑटोमेशन का फायदा होता नजर आएगा। साथ ही ऐसे सेगमेंट जिनको कोविड के दौरान भारी चोट लगी थी अब वह तेजी से कमबैक करते नजर आ सकते हैं। ऐसे में हमारा मानना है कि कंस्ट्रक्शन मटेरियल, निच टेक्नोलॉजी, ऑटो, लाइफ और जनरल इंश्योरेंस और माइक्रो लेंडर थीम से जुड़े स्टॉक्स आउटपरफॉर्म करते नजर आ सकते हैं।