इनक्रेड वेल्थ (InCred Wealth)के सीईओ नितिन राव (Nitin Rao) का मानना है कि अमेरिकी बाजारों के लिए सबसे बुरा दौर शायद खत्म हो गया है। उनका ये भी कहना है कि अमेरिका में मंदी आए या नहीं लेकिन बाजार के पिछले निचले स्तर तक गिरने की आशंका नहीं नजर आ रही है। बैंकिंग और एनबीएफसी स्पेस में 30 सालों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले राव भारत को लेकर बुलिश हैं। लेकिन उनका ये भी मानना है कि ग्रोथ के लिए दो बड़े जोखिम हैं। ये हैं सामान्य से कमजोर मानसून और देश से होने वाले निर्यात में गिरावट। यहां हम मनीकंट्रोल से हुई उनकी लंबी बातचीत का संपादित अंश दे रहे हैं।
FPI निवेश में दिखेगी बढ़त
इस बातचीत में नितिन राव ने आगे कहा कि हाल में विदेशी निवेशकों के बढ़ते रुझान के बावजूद तुलनात्मक रूप से भारत में FPI निवेश काफी कम है। इसके साथ ही अब दूसरे विकसित और उभरते बाजारों की तुलना में भारत के वैल्यूएशन प्रीमियम में भी कमी आई है। इससे भारत में FPI निवेश बढ़त दिख सकता है। इसके अलावा भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती इकोनॉमीज में है। साथ यहां के मैक्रो इकोनॉमिक आंकड़े भी काफी अच्छे संकेत दे रहे हैं। इससे भी भारतीय बाजारों की तरफ विदेशी निवेशकों का रुझान बढ़ता दिख रहा है। ये क्रम आगे भी जारी रहेगा।
आरबीआई से जल्द ही दर में कटौती की उम्मीद करना सही नहीं
आरबीआई पॉलीसी और महंगाई से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए नितिन राव ने कहा कि इस साल के मानसून को लेकर बनी अनिश्चितता (खाने-पीने की चीजों की महंगाई पर इसका संभावित प्रभाव) और जून की बैठक में फेड की तरफ से दरों में बढ़त की संभावना के देखते हुए। आरबीआई से जल्द ही दर में कटौती या नीतिगत रुख में बदलाव की उम्मीद करना सही नहीं होगा। नितिन राव का मानना है कि आरबीआई बदलती ग्लोबल और घरेलू स्थिति के आधार पर निर्णय लेने के अपने विकल्प खुले रखेगा।
आईटी सेक्टर पर बात करते हुए नितिन राव ने कहा कि इस सेक्टर में चुनिंदा कंपनियों पर ही दांव लगाने की सलाह होगी। ऐसी आईटी कंपनियों पर ही दांव लगाएं जिनका स्ट्रक्चर मजबूत दिख रहा है। आई सेक्टर में टीयर वन और टीयर टू दोनों ही सेक्टरों में कुछ कंपनियां अच्छी नजर आ रही हैं।
कैपेक्स चक्र में फिर से तेजी, कैपिटल गुड्स और मैन्यूफैक्चरिंग को होगा फायदा
कैपेक्स चक्र में फिर से तेजी आने के साथ कैपिटल गुड्स सेगमेंट ने ब्रॉडर मार्केट से बेहतर प्रदर्शन किया है। कैपिटल गुड्स कंपनियों के मिलने वाले ऑर्डर और इनके उत्पादन में बढ़ोतरी देखने के मिल रही। उम्मीद है कि आगे भी इनका बेहतर प्रदर्शन जारी रहेगा। निवेश चक्र में तेजी और मार्जिन में बढ़त को देखते हुए यह ये सेक्टर निवेश के नजरिए से अच्छा दिख रहा है।
इसी तरह स्टील, बेस मेटल्स और दूसरी कमोडिटीज की कीमतों में हालिया गिरावट मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के लिए पॉजिटिव साबित होंगी। आखिरी इंफ्रास्ट्रक्चर सुपर साइकिल के 15 साल बाद भारत नए कैपेक्स अपसाइकल के दौर में वापस आ गया है। सरकार ने पीएलआई योजना शुरू की है, जिससे मैन्यूफैक्चरिंग में अगले पांच सालों में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है। इसके मैन्यूफैक्चरिंग और कैपिटल गुड्स दोनों को फायदा होगा।
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