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Daily Voice: इक्विटी बाजार में सावधानी बरतने का वक्त, 2025 में ये 4 सेक्टर रहे सकते हैं फोकस में

2025 के लिए प्रमुख चिंताओं में ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित करने वाले भू-राजनीतिक तनाव, पॉलिसी पर अनिश्चितता, उच्च ब्याज दरों के कारण धीमी आय वृद्धि, महंगाई का लगातार बना हुआ दबाव शामिल हैं। IPO बाजार का प्रदर्शन मार्केट सेंटिमेंट और लिक्विडिटी की स्थिति पर बहुत अधिक निर्भर करेगा

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Dec 15, 2024 पर 2:00 PM
Daily Voice: इक्विटी बाजार में सावधानी बरतने का वक्त, 2025 में ये 4 सेक्टर रहे सकते हैं फोकस में
सोनम को इक्विटी बाजारों और म्यूचुअल फंड्स में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है।

2025 में डॉमेस्टिक कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, IT, कैपिटल मार्केट्स जैसे सेक्टर्स और सरकारी पूंजीगत व्यय से जुड़े सेक्टर्स की परफॉरमेंस पर प्रमुख रूप से फोकस रहेगा। यह बात राइट रिसर्च की फाउंडर और फंड मैनेजर सोनम श्रीवास्तव ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कही है। सोनम को इक्विटी बाजारों और म्यूचुअल फंड्स में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। सोनम का मानना ​​है कि आगामी अर्निंग्स सेशन में, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर लीड करेंगे। पेश हैं उनसे बातचीत के कुछ अंश...

क्या इक्विटी बाजार में सावधानी बरतने का समय आ गया है? क्या आपको लगता है कि केंद्रीय बजट के बाद ही बाजार को ठोस दिशा मिलेगी?

हां, इक्विटी बाजार में सावधानी बरतने का वक्त आ गया है। वैश्विक बाजारों में अमेरिका में बढ़ते कर्ज और डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर स्पष्टता की कमी के कारण आर्थिक और नीतिगत अनिश्चितता बहुत अधिक है। यहां तक ​​कि भारत में भी आर्थिक विकास धीमा हो गया है और महंगाई में वृद्धि के कारण दरों में कटौती में देरी हुई है।

वैश्विक और घरेलू अनिश्चितताओं के साथ, बैलेंस्ड अप्रोच बनाए रखना महत्वपूर्ण है। इतिहास गवाह है कि जब पार्टिसिपेंट्स फिस्कल पॉलिसी पर स्पष्टता का इंतजार कर रहे होते हैं, तो बाजार कंसोलिडेट होते हैं या साइडवेज चलते है, खासकर केंद्रीय बजट अवधि के दौरान। हालांकि बजट दिशा प्रदान कर सकता है लेकिन ब्रॉडर ट्राजेक्टरी, वैश्विक मौद्रिक रुझानों और कमोडिटी की कीमतों जैसे बाहरी फैक्टर्स पर भी निर्भर करेगी।

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