भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सिर्फ निवेशकों की ही नहीं, ज्यादा पूंजी की भी जरूरत: समीर अरोड़ा

भारत में बढ़ते इक्विटी कल्चर पर बात करते हुए उत्पल शेठ ने कहा कि पब्लिक हो या प्राइवेट, इक्विटी हो या डेट-भारतीय बादार के हर असेट क्लॉस में आने वाले सालों में नई ऊंचाई देखने को मिलेगी

अपडेटेड Oct 17, 2022 पर 10:05 AM
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समीर अरोड़ा के मुताबिक उन्होंने ये समझने में देरी कर दी की भारत सिर्फ निवेश के नजरिए से ही अच्छा नहीं है। बल्कि ये फंड रेजिंग और निवेश दोनों ही नजरिए से अच्छा है

हेलियस कैपिटल मैनेजमेंट (Helios Capital) के फाउंडर और फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने 16 अक्टूबर को कहा कि भारत की इकोनॉमी की ओवर ऑल साइज और ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए सिर्फ ज्यादा निवेशकों की नहीं बल्कि ज्यादा पूंजी की जरूरत है। मुंबई में एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंज मेंबर्स ऑफ इंडिया (ANMI) द्वारा आयोजित 12वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, अरोड़ा ने कहा,"निवेशकों की संख्या बढ़ने से बाजार की गहराई बढ़ जाती है, शायद बाजार की वोलैटिलिटी भी कम हो जाती है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि एक निवेशक द्वारा अपेक्षित रिटर्न में वृद्धि हो।"

इस सम्मेलन में समीर अरोड़ा के साथ एवेन्यू सुपरमार्ट्स के चेयरमैन और बीएसई के सदस्य रमेश दमानी और दिग्गज निवेशक और ट्रेडर राकेश झुनझुनवाला द्वारा स्थापित फर्म Rare Group के सीईओ और सीनियर पार्टनर उत्पल शेठ भी शामिल थे। पैनल का संचालन सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर और सीएनबीसी-टीवी18 के स्टॉक्स एडिटर अनुज सिंघल ने किया।

कहां हैं भारत में निवेश के मौके? इस सवाल के जवाब में उत्पल शेठ ने बिग बुल के एक स्टेटमेंट को दोहराते हुए कहा कि भारत में निवेश के समय लिया जाने वाला सबसे बड़ा जोखिम भारत में निवेश न करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि अधिकांश निवेशक निवेश के समय जो गल्ती करते हैं वो है गल्ती करने से डरना।


हालांकि, शेठ ने ये भी कहा कि "गोरिल्ला और बंदरों के बीच अंतर नहीं करना" एक निवेशक के रूप में उनकी सबसे बड़ी गलती थी। बता दें कि गोरिल्ला एक ऐसी कंपनी के बारे में बताने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है जो अपने सेक्टर पर हावी है, लेकिन जरूरी नहीं कि उसका अपने सेक्टर पर पूरा एकाधिकार (monopoly) हो।

उन्होंने कहा आगे कहा कि "हम कह सकते हैं कि सही स्टॉक खरीदें और उसमें बने रहें (buy right hold tight)। लेकिन यह तभी सही साबित होता है जब आप गोरिल्ला पर दांव लगा रहे हों। गोरिल्ला ऐसी कंपनियों को कहा जाता है जिनकी मैनेजमेंट टीम मजबूत होती है, जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत होता और जिनका नेतृत्व मजबूत हाथों में होता है। लेकिन अगर कंपनी गोरिल्ला नहीं है और आप इसे पकड़ कर बैठे हैं तो आपकी अपार्च्यूनिटी कॉस्ट (opportunity cost) ज्यादा होगी। ”।

समीर अरोड़ा के मुताबिक उन्होंने ये समझने में देरी कर दी की भारत सिर्फ निवेश के नजरिए से ही अच्छा नहीं है। बल्कि ये फंड रेजिंग और निवेश दोनों ही नजरिए से अच्छा है। ये उनकी गल्ती थी। उन्होंने आगे कहा कि पिछले 25 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत तो डॉलर में भारत में मिलने मिलने वाला रिटर्न दुनिया में सबसे ज्यादा रहा है। डॉलर में मिलने वाले रिटर्न के आधार पर देखें तो भारतीय बाजार ने इस अवधि में अपने दूसरे समकक्ष बाजारों की तुलना में 10-11 फीसदी ज्यादा रिटर्न दिया है।

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भारत में बढ़ते इक्विटी कल्चर पर बात करते हुए उत्पल शेठ ने कहा कि पब्लिक हो या प्राइवेट, इक्विटी हो या डेट-भारतीय बाजार के हर एसेट क्लॉस में आने वाले सालों में नई ऊंचाई देखने को मिलेगी। इस समय हम भारतीय बाजार में भागीदारी कर रहे हैं ये हमारा सौभाग्य है।

रमेश दमानी ने भी भारतीय बाजार के ग्रोथ और बाजार को लेकर निवेशकों खास कर खुदरा निवेशकों के बीच व्याप्त उम्मीद की सराहना की। उनका मानना ​​है कि खुदरा निवेशकों ने "एक लंबा सफर तय किया है" और आगे "मल्टी ईयर बुल रन" पर नजर गड़ाए हुए हैं।

गौरतलब है कि इस साल सितंबर में, भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए दुनियां की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। यही नहीं भारत 2029 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है। टॉप फाइव क्लब में शामिल होने से ठीक 1 महीने पहले, भारतीय इक्विटी बाजार के मार्केट कैप ने 3 ट्रिलियन डॉलर एक नया रिकॉर्ड बनाया था।

 

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