New World Order : ट्रंप का टैरिफ वॉर दरअसल अमेरिका और चीन के बीच वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा है। CNBC-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल के साथ खास बातचीत में दिग्गज फंड मैनेजर और एडेलवाइस के प्रेसिडेंट अजय शर्मा ने कहा कि टैरिफ वॉर से अगले 30-40 सालों के लिए दुनिया बदल गई है। भारत को इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए अपने आप को नए तरीके से पोजिशन करना होगा। साथ ही बाजार में इस समय पूंजी बचाने पर फोकस होना चाहिए।
दूसरे विश्वयुद्ध के दौर में ग्लोबल मैनेन्युफैक्चरिंग में अमेरिका की हिस्सेदारी 40 फीसदी के आसपास थी जो अब घटकर 10 फीसदी के आसपास आ गई है। WTO के बाद ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में चीन की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा बढ़ी है। अमेरिका अब केवल गूगल, फेसबुक, एक्स जैसी सर्विस सेक्टर की कंपनियों के लिए जाना जाता है। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के तबाह होने से अमेरिका में बेरोजगारी की समस्या बढ़ी है। अमेरिका विश्व की पहली महाशक्ति है और वही बना भी रहना चाहता है। लेकिन चीन बहुत तेजी से आगे बढ़ते हुए अमेरिका के बहुत करीब पहुंच गया है। जब तक अमेरिका और चीन का अंतर बहुत ज्यादा था तब तक उसे दिक्कत नहीं थी। लेकिन अब चीन अमेरिका के बराबर आता दिख रहा है। यही अमेरिका की सबसे बड़ी परेशानी।
इस बातचीत में अजय शर्मा ने पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका से दुश्मनी खतरनाक है लेकिन उससे दोस्ती भी घातक है। अमेरिका इस समय अपने दोस्तों से ही बदमाशी कर रहा है। अपने दुश्मनों से तो पंगा ले नहीं रहा है। इस समय मैक्सिको, कनाडा और यूरोप सब अमेरिका से परेशान हैं। उन्होंने आगे कहा कि जैसे सूरज के बहुत पास जाने पर आप जल जाएंगे उससे थोड़ा दूर ही रहना बेहतर होता है। इसी तरह अमेरिका से दूर ही रहने में भलाई है।
दुनिया में चीन, अमेरिका, जर्मनी जब तक मिल कर काम कर रहे थे सब ठीक चल रहा था। लेकिन चीन का तेज विकास अमेरिका को अब रास नहीं आ रहा है। लेकिन अमेरिका को ध्यान में रखना चाहिए कि चीन को अब पीछे नहीं खींचा जा सकता है। चीन और अमेरिका को मिल कर ही काम करना होगा।
चीन जब तक रोटी, कपड़ा और मकान से जुड़े छोटे प्रोडक्ट बना रहा था तब तक अमेरिका को चीन से प्रॉब्लम नहीं थी। लेकिन वही चाइना अब कार, फोन और एयर क्रॉफ्ट जैसे प्रोडक्ट अमेरिका से कम लागत में और उससे बेहतर गुणवत्ता के साथ बना रहा। अमेरिकी कंपनी के फोर्ड के चेयर मैन ने भी अभी हाल ही में कहा था कि चीन जो चीज 12 हजार डॉलर में बना रहा है उसे वे 80 हजार डॉलर में भी नहीं बना सकते हैं। इसके अलावा अब चाइनीज प्रोडक्ट्स की क्वालिटी में भी काफी सुधार आ गया है। चीन तमाम अमेरिकी कंपनियों से बेहतर प्रोडक्ट बना रहा है।
अजय शर्मा ने आगे कहा की जर्मनी के प्रोडक्ट भी काफी अच्छे होते हैं लेकिन अमेरिका को उससे परेशानी नहीं है, क्योंकि जर्मनी एक छोटा देश है जिसका प्रोडक्शन बेस काफी छोटा है। जापान भी एक इनोवेटिव देश है लेकिन वह भी एक छोटा और कम प्रोडक्शन बेस वाला देश है। रूस एक बेहतर डिफेंस टेक्नोलॉजी वाला देश है लेकिन उसकी इकोनॉमी कमजोर है। इसलिए अमेरिका को इन देशों से परेशानी नहीं है। लेकिन अब चीन के रूप में उसको अपने आकार का एक मॉस प्रोडक्शन क्षमता रखने वाला देश प्रतिद्वंद्वी के रूप में मिला है। यही अमेरिका की परेशानी है। अमेरिका को पहली बार एक ऐसा प्रतिद्वंद्वी मिला है जिसके पास रूस जैसा डिफेंस, जर्मनी जैसी मैन्युफैंक्चरिंग क्षमता, जापान जैसा इनोवेशन और अमेरिका से भी बड़ा खुद अपना बाजार है।
अमेरिका अब स्थितियों को बदल नहीं सकता है। टैरिफ वॉर से अगले 30-40 सालों के लिए दुनिया बदल गई है। पूरा वर्ल्ड ऑर्डर बदलने जा रहा है। भारत को इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए अपने आप को नए तरीके से पोजिशन करना होगा। साथ ही बाजार में इस समय पूंजी बचाने पर फोकस होना चाहिए। अब दुनिया में नए-नए गठबंधन बनेंगे। नई संधियां होगी और नये साम्राज्य बनेंगे।
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