H1B Visa: भारतीय आईटी सेक्टर को बड़ा झटका! वेतन नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी में अमेरिका
अमेरिका H-1B वीजा के तहत विदेशी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। अगर यह प्रस्ताव लागू हुआ, तो भारतीय IT कंपनियों और प्रोफेशनल्स की लागत बढ़ सकती है। एंट्री लेवल सैलरी में करीब 33% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। जानिए पूरी डिटेल।
अमेरिका ने H-1B वीजा से जुड़े वेतन नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है।
अमेरिका ने H-1B वीजा से जुड़े वेतन नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी श्रम विभाग ने 27 मार्च को एक ड्राफ्ट नियम पेश किया। इसमें विदेशी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम सैलरी औसतन करीब 30% बढ़ाने की बात कही गई है। इसका मकसद है कि विदेशी प्रोफेशनल्स अमेरिकी कर्मचारियों से कम वेतन पर काम करके वहां के वेतन संतुलन को प्रभावित न करें।
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका असर H-1B वीजा पर काम करने वाले हजारों विदेशी कर्मचारियों और उन्हें नौकरी देने वाली कंपनियों पर पड़ सकता है। खासकर भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि H-1B वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय टेक कंपनियां और प्रोफेशनल्स करते हैं।
क्या बदलाव करना चाहता है अमेरिका
अमेरिकी श्रम विभाग ने 'Improving Wage Protections for the Temporary and Permanent Employment of Certain Foreign Nationals in the United States' नाम से यह प्रस्ताव जारी किया है।
इसमें H-1B वीजा के तहत लागू चार-स्तरीय वेतन ढांचे में बदलाव की बात कही गई है। यह वेतन ढांचा एंट्री लेवल कर्मचारियों से लेकर बेहद अनुभवी प्रोफेशनल्स तक पर लागू होता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा वेतन मानक करीब 20 साल पहले तय किए गए थे। अब वे मौजूदा जॉब मार्केट और सैलरी स्ट्रक्चर को सही तरीके से नहीं दिखाते।
एंट्री लेवल सैलरी में बड़ा उछाल
प्रस्ताव के मुताबिक, एंट्री लेवल कर्मचारियों के लिए तय न्यूनतम वेतन 73,279 डॉलर से बढ़ाकर 97,746 डॉलर किया जा सकता है। यानी शुरुआती स्तर की सैलरी में 33.4% का बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
इसके अलावा दूसरे सभी वेतन स्तरों में भी अच्छी-खासी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि हर कैटेगरी के लिए अलग-अलग आंकड़े तय किए जाएंगे।
अमेरिकी सरकार की क्या दलील है
अमेरिकी श्रम विभाग का कहना है कि मौजूदा सिस्टम में कई कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को अमेरिकी कर्मचारियों की तुलना में कम वेतन पर नियुक्त कर लेती हैं, जबकि दोनों एक जैसी भूमिका में काम करते हैं।
सरकार का मानना है कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन पर दबाव पड़ता है और नौकरी बाजार में असंतुलन पैदा होता है। इसी वजह से वेतन नियमों को अपडेट करने की जरूरत महसूस की गई है।
अभी लागू नहीं हुआ है नियम
फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है। अमेरिकी सरकार ने इस पर 26 मई तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं। इसके बाद श्रम विभाग सभी सुझावों और प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करेगा और फिर अंतिम नियम जारी किया जाएगा। यानी फिलहाल पुराने नियम ही लागू हैं और अंतिम फैसला आने में अभी समय लग सकता है।
किन वीजा कैटेगरी पर पड़ेगा असर
अगर यह बदलाव लागू होता है, तो इसका असर सिर्फ H-1B वीजा तक सीमित नहीं रहेगा। H-1B1, E-3 और PERM labour certification जैसे दूसरे संबंधित वीजा प्रोग्राम भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। यानी विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
समर्थन और विरोध दोनों
इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिका में अलग-अलग राय सामने आ रही है। समर्थकों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी है। उनका मानना है कि कंपनियों को सस्ती विदेशी लेबर के जरिए वेतन दबाने का मौका नहीं मिलना चाहिए।
वहीं आलोचकों का कहना है कि इससे छोटी और मिड-साइज कंपनियों के लिए विदेशी टैलेंट को हायर करना मुश्किल हो सकता है। खासकर एंट्री लेवल कर्मचारियों को नौकरी देना महंगा पड़ सकता है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी कोशिश
अमेरिका इससे पहले भी H-1B और इमिग्रेशन नियमों में बदलाव की कोशिश कर चुका है। 2025 में एक अलग फ्री-रिलेटेड ऑर्डर जारी किया गया था। इसके अलावा ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भी वेतन नियमों में बदलाव की कोशिश हुई थी। लेकिन उस समय कानूनी चुनौतियों की वजह से मामला आगे नहीं बढ़ पाया था।
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