IT Stocks: IT शेयरों में गिरावट खरीदारी का मौका या खतरे की घंटी? जानिए क्या कह रहे एक्सपर्ट्स

IT Stocks: AI को लेकर बढ़ती चिंता के बीच IT शेयरों में गिरावट जारी है। हालांकि कुछ बड़े फंड मैनेजर्स को अब इस सेक्टर में वैल्यू नजर आने लगी है। जानिए एक्सपर्ट्स क्यों मानते हैं कि AI खतरे के साथ बड़ा मौका भी बन सकता है।

अपडेटेड May 10, 2026 पर 7:23 PM
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बड़े संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी अभी भी आईटी सेक्टर में बहुत ज्यादा नहीं है।

IT Stocks: आईटी सेक्टर पिछले काफी समय से दबाव में है। AI को लेकर बढ़ती चर्चा, कमजोर वैश्विक खर्च और कंपनियों की सुस्त ग्रोथ गाइडेंस की वजह से निवेशक इस सेक्टर को लेकर सतर्क बने हुए हैं। हालांकि अब कुछ बड़े फंड मैनेजर्स को लगने लगा है कि आईटी शेयरों में वैल्यू वापस दिख रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि क्या AI सिर्फ अस्थायी दबाव बना रहा है या यह आईटी सेक्टर के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

मुंबई में 9 मई को आयोजित Groww India Investor Festival 2026 में ICICI Prudential Mutual Fund के CIO एस नरेन और PPFAS Mutual Fund के CIO राजीव ठक्कर ने इसी मुद्दे पर अपनी राय रखी। दोनों का मानना है कि AI का असर जरूर पड़ेगा, लेकिन भारतीय आईटी कंपनियों को लेकर पूरी तरह नकारात्मक होना अभी जल्दबाजी हो सकती है।

वैल्यूएशन सस्ता, पर डर का माहौल


ICICI Prudential Mutual Fund के CIO एस नरेन ने कहा कि आईटी सेक्टर की वैल्यूएशन अब पहले के मुकाबले काफी सस्ती हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह AI को लेकर बढ़ती चिंता है। बाजार को डर है कि AI आने वाले समय में ट्रेडिशनल सॉफ्टवेयर सर्विसेज की मांग कम कर सकता है।

हालांकि नरेन का कहना है कि अभी यह साफ नहीं है कि यह सिर्फ अस्थायी स्लोडाउन है या वाकई बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव बनने जा रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल बाजार इसी सवाल से जूझ रहा है।

नरेन के मुताबिक ग्लोबल टेक्नोलॉजी स्पेडिंग और AI कैपेक्सट की वजह से भी आईटी सेक्टर पर दबाव बना हुआ है। इसी कारण निवेशकों के बीच यह बहस जारी है कि आईटी शेयरों में मौजूदा गिरावट एक मौका है या फिर यह 'वैल्यू ट्रैप' साबित हो सकती है।

संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी

एस नरेन ने कहा कि हाल में कुछ खरीदारी जरूर हुई है, लेकिन बड़े संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी अभी भी आईटी सेक्टर में बहुत ज्यादा नहीं है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2020 के दौरान टेलीकॉम, पावर और PSU सेक्टर में फंड्स की हिस्सेदारी बेंचमार्क के मुकाबले काफी ज्यादा थी। लेकिन फिलहाल आईटी सेक्टर में ऐसी आक्रामक पोजिशिनिंग देखने को नहीं मिल रही।

उनका मानना है कि अगर AI का असर वास्तव में बहुत बड़ा होता है, तो उसका प्रभाव सिर्फ आईटी सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। कई दूसरे सेक्टर्स भी इससे प्रभावित होंगे। लेकिन फिलहाल बाजार सबसे ज्यादा दबाव आईटी कंपनियों पर ही बना रहा है।

AI से पूरी इंडस्ट्री खत्म नहीं हो जाएगी

PPFAS Mutual Fund के CIO राजीव ठक्कर ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियां पिछले कई दशकों में कई बड़े बदलावों और संकटों से निकल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि करीब 26 साल पहले भी लोगों को लगता था कि आईटी सर्विस कंपनियों का भविष्य खतरे में है।

उन्होंने याद दिलाया कि 1990 के दशक के आखिर में बाजार को लगता था कि भारतीय आईटी कंपनियां सिर्फ Y2K प्रोजेक्ट्स पर टिकी हुई हैं। फिर डॉटकॉम क्रैश आया। इसके बाद SaaS वेव के दौरान भी सवाल उठे कि जब सॉफ्टवेयर क्लाउड पर उपलब्ध होगा, तो IT सर्विसेज कंपनियों की जरूरत क्यों पड़ेगी। लेकिन हर बार भारतीय आईटी कंपनियों ने खुद को नए माहौल के हिसाब से ढाल लिया।

AI से मांग घटेगी नहीं, बढ़ भी सकती है

राजीव ठक्कर का मानना है कि AI से प्रोडक्टिविटी जरूर बढ़ेगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि IT कंपनियों का मुनाफा खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर पहले 10 डेवलपर्स का काम अब 5 इंजीनियर्स कर सकते हैं, तो इससे लागत कम होगी। लेकिन जब किसी तकनीक की लागत घटती है, तो उसका इस्तेमाल अक्सर बढ़ भी जाता है।

उन्होंने टेलीकॉम और डिस्काउंट ब्रोकिंग सेक्टर का उदाहरण देते हुए Jevons’ Paradox का जिक्र किया। यह आर्थिक सिद्धांत कहता है कि जब कोई चीज सस्ती हो जाती है, तो लोग उसका इस्तेमाल ज्यादा करने लगते हैं। ठक्कर के मुताबिक AI की वजह से टेक्नोलॉजी सर्विसेज सस्ती हो सकती हैं और इससे लंबे समय में मांग और बढ़ सकती है।

बाजार अभी भी कन्फ्यूजन में है

फिलहाल बाजार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि AI आईटी सेक्टर के लिए अवसर बनेगा या खतरा। इसी वजह से निवेशकों का रुख अब भी पूरी तरह साफ नहीं है।

हालांकि कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय आईटी कंपनियों का लंबा अनुभव, मजबूत बैलेंस शीट और बदलती तकनीक के साथ खुद को ढालने की क्षमता उन्हें आगे भी मजबूत बनाए रख सकती है।

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