मामले की जानकारी रखने वाले वाले एक सरकारी सूत्र के हवाले से शुक्रवार को पता चला है कि भारत सरकार ने माइनिंग कंपनी हिंदुस्तान जिंक द्वारा कंपनी को अलग-अलग इकाइयों में विभाजित करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। भारत सरकार हिंदुस्तान जिंक में सबसे बड़ी माइनॉरिटी शेयरधारक है। सरकार के पास हिंदुस्तान जिंक में 29.54 फीसदी हिस्सेदारी है। नाम न छापने का अनुरोध करते हुए सूत्रों ने बताया कि जब कंपनी ने जस्ता, सीसा, चांदी और रीसाइक्लिंग कारोबार के लिए अलग इकाइयां बनाने के लिए कंपनी को विभाजित करने का निर्णय लिया तो इस पर उसने सरकार से परामर्श नहीं किया।
इस प्लान पर हिंदुस्तान जिंक ने कहा था कि यह विभाजन योजना कंपनी के लिए अपार संभावनाओं के द्वार खोलेगी। लेकिन सरकारी सूत्र ने कहा कि इससे शेयरधारकों के लिए वैल्यू क्रिएशन होने की संभावना नहीं है। सूत्रों के मुताबिक हिंदुस्तान जिंक का प्रबंधन करने वाले खान मंत्रालय ने कंपनी को अपनी आपत्ति के बारे में सूचित कर दिया है।
सरकार के खान मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और हिंदुस्तान जिंक ने इस खबर पर अभी तक कोई सफाई नहीं दी है। मार्च में, सरकार ने दो वेदांत कंपनियों को खरीदने के हिंदुस्तान जिंक के एक और प्रस्ताव का विरोध किया था। सरकार मार्केट रेग्युलेटर सेबी को पत्र लिखकर अपना विरोध जताया था। इसके बाद कंपनी ने ये योजना रद्द कर दी थी। गौरतलब है कि हिंदुस्तान जिंक में वेदांता की 64.9 फीसदी हिस्सेदारी है।
हिंदुस्तान जिंक की चाल पर नजर डालें तो 1.30 बजे के आसपास एनएसई पर ये शेयर 3.10 रुपए यानी 1.05 फीसदी की तेजी के साथ 298 रुपए के आसपास दिख रहा है। आज का इसका दिन का हाई 297.95 रुपए और दिन का लो 293.20 रुपए है। स्टॉक का वॉल्यूम 419,782 शेयरों के आसपास दिख रहा है। कंपनी का मार्केट कैप 125,597 रुपए हैं।
हिंदुस्तान जिंक ने पिछले 1 हफ्ते में 2.89 फीसदी रिटर्न दिया है। वहीं, 1 महीने में इस शेयर ने 4.13 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है। 3 महीने में हिंदुस्तान जिंक 4.02 फीसदी टूटा है। 1 साल में स्टॉक ने 6.53 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है। जबकि 3 साल में इस शेयर ने 6.79 फीसदी का पॉजिटिव रिटर्न दिया है।