आखिर Silicon Valley Bank क्यों डूबा, क्या इंडिया में भी बैंकों पर मंडरा रहा खतरा?
साल 2022 के अंत में Silicon Valley Bank के पास 209 अरब डॉलर का एसेट था। फिर, कुछ ही महीनों में इस बैंक की हालत इतनी बिगड़ गई कि यह दिवालिया हो गया। इसका कैश बैलेंस निगेटिव हो गया है। इसके कई डिपॉजिटर्स के पैसे को इंश्योरेंस कवर हासिल नहीं है
Silicon Valley Bank की शुरुआत 1983 में हुई थी। यह ज्यादातर टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टार्टअप्स को बैंकिंग सेवाएं देता था।
Silicon Valley Bank के डूबने की खबरें लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। यह अमेरिकी बैंक है, लेकिन इसकी खबरें दुनियाभर में पढ़ी जा रही हैं। इंडिया में भी इस बैंक को लेकर खूब चर्चा हो रही है। कई लोगों को 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस की याद आ रही है। इससे इनवेस्टर्स के बीच डर का माहौल है। इंडिया में भी बैंकों में डिपॉजिट रखने वाले लोग थोड़ा डरे हुए हैं। वे जानना चाहते हैं कि क्या SVB के डूबने का असर इंडिया में भी बैंकों पर पड़ सकता है। आखिर SVB क्यों डूब गया? इसके डूबने से सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ेगा? SVB के डिपॉजिटर्स के पैसे का क्या होगा? SVB के डूबने को स्टार्टअप्स के लिए बड़ा झटका क्यों माना जा रहा है? आइए इन सवालों के जवाब जानते हैं।
बॉन्ड में निवेश से SVB को कितना लॉस?
SVB ने 8 मार्च (बुधवार) को बताया कि उसने 21 अरब डॉलर के बॉन्ड बेच दिए हैं। इससे उसे 1.18 अरब डॉलर का लॉस हुआ है। उसने यह भी कहा कि वह पूंजी जुटाने की कोशिश कर रहा है। बैंक के इस ऐलान के बाद इसके डिपॉजिटर्स डर गए। उन्होंने बैंक से अपने डिपॉजिट निकालने शुरू कर दिए। बैंक की शाखाओं के बाहर इसके ग्राहकों की लाइन लग गई। डिपॉजिटर्स को लगा कि SVB में उनका पैसा सुरक्षित नहीं है। ज्यादा नुकसान की स्थिति में उनका डिपॉजिट भी डूब सकता है।
एसवीबी की वित्तीय स्थिति खराब को लेकर तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई। इसका असर इसके शेयरों की कीमतों पर पड़ा। इसके शेयर के प्राइस 60 फीसदी से ज्यादा टूट गए। शेयर मार्केट में अफरा-तफरी मच गई। इसका असर दूसरे बैंकों के शेयरों के प्राइसेज पर भी पड़ा। कुछ एक्सपर्ट्स ने कहा कि बैंकिंग सिस्टम के लिए यह कितना बड़ा झटका है, इसके बारे में जानने के लिए छोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। लेकिन, यह तय है कि 2008 की फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद यह अमेरिका में किसी बड़े बैंक के डूबने की सबसे बड़ी घटना है।
बैलेंसशीट निगेटिव होने का क्या मतलब?
Silicon Valley Bank ने 9 मार्च को रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि उसका कैश बैलेंस निगेटिव हो गया है। इसका मतलब यह है कि उसके पास जितने पैसे हैं, उससे ज्यादा उस पर देनदारी है। उसने 95.8 करोड़ डॉलर निगेटिव कैश की जानकारी रेगुलेटर को दी। हालांकि, बैंक ने यह कहा कि कुल वित्तीय स्थिति खराब नहीं है, लेकिन इनवेस्टर्स और डिपॉजिटर्स ने करीब 42 अरब डॉलर के डिपॉजिट निकाल लिए। इससे बैंक का वजूद खतरे में पड़ गया।
10 मार्च को किसने किया बैंक को बंद करने का ऐलान?
Federal Deposit Insurance Corporation (FDIC) ने 10 मार्च को ऐलान किया कि कैलिफोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ प्रोटेक्शन एंड इनोवेशन ने Silicon Valley Bank को बंद करने का फैसला लिया है। FDIC ने इसे रिसीवर नियुक्त किया था। FDIC ने ऐसी सभी ग्राहक जिनके डिपॉजिट का बीमा है, उन्हें बताया है कि 13 मार्च तक उन्हें अपने अकाउंट का पूरा एक्सेस हासिल होगा। लेकिन, इसमें पेंच यह है कि डिपॉजिट पर इंश्योरेंस कवर की सीमा 1,50,000 डॉलर है। इसका मतलब है कि इससे ज्यादा डिपॉजिट रखने वाले ग्राहकों को लॉस होगा।
डिपॉजिटर्स के पैसे का क्या होगा?
SVB के ऐसे ग्राहक काफी डरे हुए हैं, जिनके डिपॉजिट का बीमा नहीं है। कई डिपॉजिटर्स को यह पता नहीं है कि उनके डिपॉजिट का बीमा है या नहीं। इस बीच रेगुलेटर्स की तरफ से ऐसे ग्राहकों को एक टोल-फ्री नंबर पर कॉल करने को कहा गया है। अब FDIC सिलिकॉन वैली बैंक के एसेट्स को बेचेगी। इससे मिलने वाले पैसे से उन डिपॉजिटर्स को पैसे लौटाए जाएंगे जिनके डिपॉजिट का इंश्योरेंस नहीं है।
कब हुई थी सिलिकॉन वैली बैंक की शुरुआत?
Silicon Valley Bank की शुरुआत 1983 में हुई थी। यह ज्यादातर टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टार्टअप्स को बैंकिंग सेवाएं देता था। अमेरिका में वेंचर फंडों की मदद से ऑपरेट करने वाले टेक्नोलॉजी और हेल्थ केयर कंपनियों में से करीब 50 फीसदी की फाइनेंसिंग SVB करता था। इसलिए ये स्टार्टअप्स अपने पैसे इसी बैंक में रखना पसंद करते थे। यह अमेरिका का 16वां सबसे बड़ा बैंक था। साल 2022 के अंत में इसका एसेट्स करीब 209 अरब डॉलर था।
क्या दूसरे बैंकों के भी डूबने का खतरा हैं?
Pershing Square Capital Management के सीईओ Bill Ackman ने एक बयान दिया है, जो डर पैदा करता है। यह बयान सिलिकॉन वैली बैंक (Silicon Valley Bank) के ध्वस्त हो जाने के बाद आया है। Ackman ने कुछ और बैंकों के डूबने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा है कि अमरिकी अथॉरिटीज के हस्तक्षेप के बावजूद कुछ और बैंकों के डूबने की आशंका है। हालांकि, अमेरिकी अथॉरिटीज सिलिकॉन वैली क्राइसिस के बाद बैंकिंग सिस्टम में इनवेस्टर्स का भरोसा बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।
क्या इंडिया में भी बैंकों पर मंडरा रहा खतरा?
स्टेकहोल्डर इम्पावरमेंट सर्विसेज के जेएन गुप्ता ने कहा, "जहां तक इंडियन बैंकिंग सेक्टर का संबंध है तो एसवीबी के डूबने का इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेंडिंग रेशियो के मामले में इंडियन बैंक्स अभी बहुत सेक्योर स्थिति में हैं। इक्विटी मार्केट्स की बात करें तो इसका मामूली असर होगा। दुनिया में अगर कुछ बड़ा होता है तो इसका असर हर मार्केट पर पड़ता है।" नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर एक ब्रोकर ने कहा कि इनवेस्टर्स मार्केट को करीब से देखने की कोशिश कर रहे हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा, "इसका हमारे बैंकिंग सेक्टर पर असर पड़ने की संभावना नहीं है। इसकी वजह यह है कि हमारा बैंकिंग सिस्टम बहुत बड़ा है और इसका इस तरह का एक्सपोजर भी नहीं है। यहां मसला यह है कि स्टार्टअप्स की तरफ से डिपॉजिट आया था और शॉर्टफॉल की वजह से बैंक को अपने सिक्योरिटीज बेचने पड़े, जिससे इसकी वैल्यू में गिरावट आई। हमारे यहां ऐसी स्थिति नहीं है। SVB इतना छोटा बैंक है कि इसके डूबने का ज्यादा असर अमेरिकी बैंकिंग सेक्टर पर भी नहीं पड़ेगा। रेगुलेटर इस मामले को देख रहा है।"