यूरोप की सबसे बड़ी इकोनॉमी जर्मनी अब अपने वित्तीय नियमों में ढील दे रही है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए बड़े अवसर खुल सकते हैं। जर्मनी की संसद ने 21 मार्च को आधिकारिक रूप से अपने "डेट ब्रेक" मैकेनिज्म में सुधार किया। यह नियम 2009 में तत्कालीन चांसलर एंजेला मर्केल के कार्यकाल में लागू किया गया था, जिसके तहत सरकार को ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) के केवल 0.35% तक का ही कर्ज लेने की अनुमति थी। इसके अलावा, जर्मनी के प्रांतीय राज्यों को कर्ज लेने की इजाजत नहीं थी।
इस सख्त नियम का उद्देश्य 2008 की ग्लोबल मंदी के बाद कर्ज को सीमित रखना और यूरोपीय संघ (EU) के खर्च नियमों का पालन करना था। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का मानना था कि यह नियम सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और क्राइसिस मैनेजमेंट पर खर्च को बाधित कर रहा था।
हालांकि अब, जब जर्मनी ने इस नियम को आसान बना दिया है, तो सरकार को अधिक कर्ज लेने और खर्च करने की आज़ादी मिल गई है। इसका सीधा असर यह होगा कि अरबो यूरो का निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।
भारतीय कंपनियों को कैसे फायदा होगा?
जर्मनी की इस आर्थिक नीति में बदलाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखने लगा है। 19 मार्च को जब जर्मनी की संसद ने इन सुधारों का प्रस्ताव रखा, तो भारतीय रक्षा कंपनियों के शेयर उछाल मारने लगे। इन कंपनियों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली-
- मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (Mazagon Dock) – 10% इंट्रा-डे उछाल
- गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (Garden Reach Shipyard) – 20% अपर सर्किट हिट किया
- कोचीन शिपयार्ड (Cochin Shipyard) – 8.8% बढ़त
- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (Hindustan Aeronautics Limited) – 4.4% की तेजी
- भारत डायनामिक्स (Bharat Dynamics) – 6% की बढ़त
शेयर बाजार ने साफ संकेत दिए कि जर्मनी का बढ़ता डिफेंस बजट, भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए नए अवसर खोल सकता है।
किन अन्य सेक्टर्स को फायदा होगा?
सिर्फ डिफेंस सेक्टर ही नहीं, बल्कि अन्य सेक्टर को भी इस बदलाव का लाभ मिल सकता है। जर्मनी ने 500 अरब यूरो (करीब 545 अरब डॉलर) के एक फंड की घोषणा की है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश करेगा। यूरोप में काम करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए यह नए बिजनेस पाने का शानदार मौका हो सकता है। टीसीएस, इंफोसिस, L&T और भारत फोर्ज जैसी कंपनियां इन परियोजनाओं से लाभ उठाने की अच्छी स्थिति में हैं।
जर्मनी की सरकार ग्रीन एनर्जी, स्मार्ट सिटीज और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश करने जा रही है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए यूरोप में नए कॉन्ट्रैक्ट्स मिलने की संभावना बढ़ गई है।