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शेयर मार्केट के लिए जर्मनी से आई अच्छी खबर, इन भारतीय स्टॉक्स में दिख सकती है बड़ी हलचल

यूरोप की सबसे बड़ी इकोनॉमी जर्मनी अब अपने वित्तीय नियमों में ढील दे रही है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए बड़े अवसर खुल सकते हैं। जर्मनी की संसद ने 21 मार्च को आधिकारिक रूप से अपने "डेट ब्रेक" मैकेनिज्म में सुधार किया। यह नियम 2009 में तत्कालीन चांसलर एंजेला मर्केल के कार्यकाल में लागू किया गया था, जिसके तहत सरकार को ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) के केवल 0.35% तक का ही कर्ज लेने की अनुमति थी

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Mar 22, 2025 पर 2:49 PM
शेयर मार्केट के लिए जर्मनी से आई अच्छी खबर, इन भारतीय स्टॉक्स में दिख सकती है बड़ी हलचल
जर्मनी ने इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु परिवर्तन के लिए 500 अरब यूरो के एक फंड की घोषणा की है

यूरोप की सबसे बड़ी इकोनॉमी जर्मनी अब अपने वित्तीय नियमों में ढील दे रही है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए बड़े अवसर खुल सकते हैं। जर्मनी की संसद ने 21 मार्च को आधिकारिक रूप से अपने "डेट ब्रेक" मैकेनिज्म में सुधार किया। यह नियम 2009 में तत्कालीन चांसलर एंजेला मर्केल के कार्यकाल में लागू किया गया था, जिसके तहत सरकार को ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) के केवल 0.35% तक का ही कर्ज लेने की अनुमति थी। इसके अलावा, जर्मनी के प्रांतीय राज्यों को कर्ज लेने की इजाजत नहीं थी।

इस सख्त नियम का उद्देश्य 2008 की ग्लोबल मंदी के बाद कर्ज को सीमित रखना और यूरोपीय संघ (EU) के खर्च नियमों का पालन करना था। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का मानना था कि यह नियम सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और क्राइसिस मैनेजमेंट पर खर्च को बाधित कर रहा था।

हालांकि अब, जब जर्मनी ने इस नियम को आसान बना दिया है, तो सरकार को अधिक कर्ज लेने और खर्च करने की आज़ादी मिल गई है। इसका सीधा असर यह होगा कि अरबो यूरो का निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।

भारतीय कंपनियों को कैसे फायदा होगा?

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