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अमेरिका में आने वाली है 2008 से भी बड़ी मंदी? जानें सेंसेक्स और निफ्टी में क्यों मची है खलबली

Stock Market Crash: बेरोजगारी दर से जुड़ा एक नियम अमेरिका में मंदी के आने की भविष्यवाणी कर रहा है। इसका नाम है Sahm Rule (साहम रूल)। यह नियम कहता है कि अगर बेरोजगारी दर का 3 महीने का औसत पिछले 12 महीने के न्यूनतम से 0.5% ज्यादा हो तो मंदी आ सकती है। फिलहाल जुलाई में साहम रूल का यह आंकड़ा 0.53 फीसदी पर पहुंच गया। इससे पहले जून में यह 0.43 फीसदी था

Moneycontrol Newsअपडेटेड Aug 05, 2024 पर 7:07 PM
अमेरिका में आने वाली है 2008 से भी बड़ी मंदी? जानें सेंसेक्स और निफ्टी में क्यों मची है खलबली
Stock Market Crash: अमेरिकी में पिछले महीने बाजार के अनुमानों से 35% कम नौकरियां आई

Stock Market Crash: दुनिया भर के शेयर बाजारों के लिए आज तबाही का दिन रहा। भारत से लेकर जापान और यूरोप तक, दुनिया का हर शेयर मार्केट आज भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। जापान में तो 1987 के बाद की यानी पिछले करीब 37 सालों की सबसे बड़ी गिरावट आई। भारत में तो लोगों के शेयर बाजार में करीब 15.5 लाख करोड़ रुपये डूब गए। इस पूरी गिरावट के जड़ में जो सबसे बड़ा रीजन रहा, वो था अमेरिका। तमाम आर्थिक आंकड़े अमेरिका में मंदी आने की आशंका जता रहे हैं। इस एक बात पूरी दुनिया के निवेशकों को परेशान कर दिया है। आइए जानते हैं कि क्या अमेरिका में 2008 की जैसी मंदी आने वाली है? आखिर क्यों ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है और अगर यह मंदी आई तो भारत सहित दुनिया भर के शेयर बाजारों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

अमेरिका में पिछले हफ्ते बेरोजगारी से जुड़ा एक आंकड़ा आया। इस आंकड़े के चलते वहां पर मंदी आने की आशंका जताई जाने लगी है। इस आंकड़े के मुताबिक, अमेरिकी में पिछले महीने 1.14 लाख नौकरियां आई। यह बाजार के अनुमानों से करीब 35 फीसदी कम था। नौकरी कम आने के चलते अमेरिका में बेरोजगारी दर अब 4.3 फीसदी पर पहुंच गई। यह अक्टूबर 2021 के बाद का इसका सबसे ऊंचा स्तर है। इस आंकड़े से यह टेंशन बढ़ गई है कि अमेरिकी की सरकार और वहां के केंद्रीय बैंक, यूएस फेडरल रिजर्व की ओर से मंदी को रोकने के लिए की जा रही कोशिशें काफी नहीं है और अमेरिकी इकोनॉमी मंदी की चपेट में आ सकता है।

इसके अलावा एक और नियम है, जो अमेरिका में मंदी के आने की भविष्यवाणी कर रहा है। इसका नाम है Sahm Rule (साहम रूल)। यह नियम कहता है कि अगर बेरोजगारी दर का 3 महीने का औसत पिछले 12 महीने के न्यूनतम से 0.5% ज्यादा हो तो मंदी आ सकती है। फिलहाल जुलाई में साहम रूल का यह आंकड़ा 0.53 फीसदी पर पहुंच गया। इससे पहले जून में यह 0.43 फीसदी था। साहम रूल की हर जगह चर्चा इसलिए भी है क्योंकि यह नियम 1970 से अबतक सही साबित हुआ है।

हालांकि साहम रुल को बनाने वाली इकोनॉमिस्ट, क्लाउडिया साहम (Claudia Sahm) का कहना है कि वास्तव में अभी मंदी शुरू नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि मुझे अभी ऐसा नहीं लग रहा है कि हम इस समय मंदी में है। फिलहाल किसी को इससे घबराना नहीं चाहिए। हालांकि साहम ने यह भी कहा कि भविष्य में मंदी नहीं आ सकती, हमें इसकी संभावना को खारिज नहीं करना चाहिए।

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