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अमेरिका-बांग्लादेश डील का कोई खास असर नहीं? स्पिनिंग स्टॉक्स में इस कारण अधिक दबाव

बांग्लादेश और अमेरिका के बीच हुए कारोबारी डील की आंच में भारतीय मार्केट में लिस्टेड स्पिनिंग से जुड़े टेक्सटाइल स्टॉक्स अधिक झुलस सकते हैं। हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि नियर टर्म में तो अधिक झटके की आशंका नहीं है लेकिन मीडियम और लॉन्ग टर्म में अधिक झटका लग सकता है। जानिए ऐसा क्यों और स्पिनिंग सेक्टर को अधिक शॉक क्यों?

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Feb 12, 2026 पर 12:57 PM
अमेरिका-बांग्लादेश डील का कोई खास असर नहीं? स्पिनिंग स्टॉक्स में इस कारण अधिक दबाव
अमेरिका और बांग्लादेश की डील से भारतीय स्पिनिंग कंपनियों को मीडियम टर्म में झटका लगने की आशंका है लेकिन नियर टर्म में लॉजिस्टिकल और ऑपरेशनल दिक्कतों के चलते सीमित असर ही दिखने के आसार हैं।

स्पिनिंग से जुड़े टेक्सटाइल स्टॉक्स जैसे कि केपीआर मिल (KPR Mill), अंबिका कॉटन मिल्स (Ambika Cotton Mills) , नितिन स्पिनर्स (Nitin Spinners) और ट्राइडेंट (Trident) इस हफ्ते अब तक 8% तक गिर चुके हैं। यह गिरावट तब आई जब अमेरिका ने बांग्लादेश के लिए टैरिफ की दरें घटाकर 19% कर दीं और यह भी सहूलिय दी कि अगर बांग्लादेश की टेक्सटाइल कंपनियां अमेरिकी कपास या मैनमेड फाइबर का इस्तेमाल करती हैं तो टैरिफ शून्य हो जाएगा। इससे घरेलू मार्केट में हाहाकार मच गया क्योंकि बांग्लादेश अभी भारत से बड़ी मात्रा में कपास और धागा (यार्न) आयात करता है लेकिन अब अमेरिकी राहत से आशंका है कि मीडियम टर्म में स्पिनिंग कंपनियों के एक्सपोर्ट वॉल्यूम और कमाई पर दबाव पड़ सकता है।

नियर टर्म में दबाव की क्यों कोई आशंका नहीं?

अमेरिका और बांग्लादेश की डील से भारतीय स्पिनिंग कंपनियों को मीडियम टर्म में झटका लगने की आशंका है लेकिन नियर टर्म में लॉजिस्टिकल और ऑपरेशनल दिक्कतों के चलते सीमित असर ही दिखने के आसार हैं। मार्केट एक्सपर्ट सुनीन सुब्रमण्यम का कहना है कि अमेरिकी कपास की खेप को चिटगांव पहुंचने में 40 दिन से अधिक लगते हैं, जबकि भारत से जमीनी रास्ते से यह सिर्फ 4–7 दिनों में पहुंच जाता है, जिससे सोर्सिंग में तेजी से बदलाव करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा बांग्लादेश का स्पिनिंग सेक्टर अभी इतना बड़ा नहीं है कि वह अमेरिकी कपास को घरेलू स्तर पर प्रोसेस कर सके। उसे अभी भी धागा बाहर से मंगाना पड़ता है, और इसके लिए भारत सबसे बेहतर लॉजिकल स्रोत बना हुआ है।

एमके ग्लोबल के को-फंड मैनेजर और रिसर्च हेड कश्यप जावेरी का भी ऐसा मानना है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की स्पिनिंग इंडस्ट्री अभी भी बिजली की अस्थिर सप्लाई, हाई ऑपरेटिंग कॉस्ट और अमेरिकी कपास के आयात में लंबे लीड टाइम जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, जिससे ट्रांजिशन की रफ्तार धीमी हो सकती है।

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